चीन में भारतीय पेशेवरों का हाल-बेहाल, जयशंकर से गुहार, संकट से उबारो हमें

चीन में लंबे वक्त से काम कर रहे कई भारतीय पेशेवरों ने चीन में मौजूद भारतीय दूतावासों की मदद से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक संयुक्त याचिका भेजी है। उनका कहना है कि हम कोरोना महामारी और संबंधित यात्रा और वीजा व्यवधानों के कारण 26 महीने से बच्चों सहित अपने परिवारों से अलग हो गए हैं।

चीन में भारतीय पेशेवरों का हाल-बेहाल, जयशंकर से गुहार, संकट से उबारो हमें
Photo by Ling Tang / Unsplash

जैसे ही चीन ने दो साल से अधिक वक्त के बाद कुछ भारतीय छात्रों को देश में फिर से पढ़ाई के लिए आने की अनुमति देने की घोषणा की, वैसे ही अब कई भारतीय पेशेवरों ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि वह चीन के समक्ष उनकी दुर्दशा को लेकर बात करें और उन्हें परेशानियों से उबारें।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी की नई दिल्ली की मार्च यात्रा के दौरान छात्रों के मुद्दे को उठाने के लिए जयशंकर के कदम का स्वागत करते हुए भारतीय पेशेवरों ने एक ज्ञापन दिया है।

दरअसल बीजिंग के कड़े कोविड वीजा नियमों के कारण अनेकों भारतीय पेशेवर दो वर्ष से अधिक समय से अपने परिवार से ​अलग हैं। चीन में 5 से 27 साल तक के लंबे वक्त से काम कर रहे कई भारतीय पेशेवरों ने 1 मई को चीन के कई शहरों में मौजूद  भारतीय दूतावासों की मदद से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक संयुक्त ज्ञापन भेजा है। बीजिंग, शंघाई और चीन के अन्य शहरों में रहने वाले इन पेशेवरों ने ज्ञापन में कहा कि हम कोरोना महामारी और संबंधित यात्रा और वीजा व्यवधानों के कारण 26 महीने से अधिक समय से बच्चों सहित अपने संबंधित परिवारों से अलग हो गए हैं।

याचिकाकर्ताओं में ऐसे माता-पिता भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने नवजात शिशुओं को दो साल से अधिक समय से नहीं देखा है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी हैं जिनके बच्चे चीन में पढ़ रहे थे और वीजा और उड़ानें रद्द होने के कारण वह स्कूलों में फिर से शामिल होने के लिए वापस नहीं लौट सके, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित हो गई है। बता दें कि वुहान में कोरोना वायरस फैलने के तुरंत बाद 2020 में दर्जनों भारतीय पेशेवरों के परिवारों ने चीन छोड़ दिया था। लेकिन बहुत से भारतीय पेशेवर ऐसे थे जिनके या तो कारोबार चीन में हैं या वे अपनी नौकरी को नहीं छोड़ सकते थे।​ इसलिए वे वापस नहीं आ सके। हालांकि फिर भी उनका जीवन और कारोबार पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी की नई दिल्ली की मार्च यात्रा के दौरान छात्रों के मुद्दे को उठाने के लिए जयशंकर के कदम का स्वागत करते हुए भारतीय पेशेवरों ने अपने ज्ञापन में कहा कि हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि इस अवसर का उपयोग हमारे अलग-अलग परिवार के सदस्यों की सूची को आगे बढ़ाने के लिए करें। महामारी के दो साल के अंत में जब दुनिया के कई अन्य हिस्सों में जीवन सामान्य हो रहा है, दुर्भाग्य से हमें अभी भी कोई प्रकाश होता नहीं दिख रहा है। इससे हमारा पारिवारिक जीवन बाधित रहता है और अनिश्चितता में लटका हुआ है।

बीजिंग में 12 साल से अधिक समय से रह रहे एक अनिल पांडे ने मीडिया को बताया कि मैं अपने नवजात शिशु से एक बार भी नहीं मिल पाया। वह जल्द ही दो साल की हो जाएगी। मुझे अपनी बड़ी बेटी की भी बहुत याद आती है, जो इस साल पांच साल की हो जाएगी। मैं मौजूदा स्थिति के बारे में बहुत असहाय महसूस करता हूं। पांडे का परिवार जो बीजिंग में उनके साथ रहा करता था वह वुहान शहर में कोरोना के प्रकोप के बाद जनवरी 2020 की शुरुआत में छुट्टी के लिए भारत वापस जाने के बाद से चीन नहीं लौट पाया।

एक उद्यमी राकेश कुमार सेठी ने कहा कि मेरी पत्नी रंजना दिसंबर 2019 में भारत गई थी और तब से हम नहीं मिले हैं। हम दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं और स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक कारणों से एक-दूसरे की देखभाल की जरूरत है। सेठी पिछले 14 वर्षों से बीजिंग में रह रहे हैं और उन्होंने बीजिंग में एक बिलियन अमरीकी डालर के वार्षिक कारोबार के साथ लगातार अपनी कंपनी बनाई है। एक अन्य अभिषेक जी भाया ने बताया कि मैं अक्सर 1 फरवरी 2020 को बीजिंग हवाई अड्डे पर अपनी पत्नी और बेटी के साथ ली गई आखिरी तस्वीर को देखता हूं जिस दिन वे चीन में नए वायरस की बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के लिए रवाना हुए थे।