ब्रिटिश अदालत ने इसलिए किया बरी, जबकि भारत उसे आतंकवादी मानता था

ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्टने फैसले में कहा कि आरोपी को बरी किया जाना चाहिए क्योंकि मामले में विवरण संतुष्ट नहीं थे। भारत सरकार का आरोप था कि हजारिका सुरक्षा बलों पर हमले शुरू करने के लिए आतंकवादी शिविर आयोजित करता था, जिससे भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का इरादा था।

ब्रिटिश अदालत ने इसलिए किया बरी, जबकि भारत उसे आतंकवादी मानता था

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) या ULFA (I) के कथित तौर पर अध्यक्ष होने के आरोप में भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ ब्रिटेन में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले भारतीय मूल के डॉक्टर को ब्रिटिश अदालत ने बरी कर दिया है।

उत्तरी इंग्लैंड के क्लीवलैंड में रहने वाले एक ब्रिटिश नागरिक और सामान्य चिकित्सक 75 वर्षीय डॉ. मुकुल हजारिका पर भारतीय अधिकारियों ने Unlawful Activities (Prevention) Act 1967 के तहत भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने का प्रयास करने या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने के आरोप लगाए थे और ब्रिटेन में मुकदमा चलाने की मांग की थी। इसके अलावा अधिकारियों ने डॉ. मुकुल पर यह भी आरोप लगाया था कि वह देश में आतंकवादी साजिशों के पीछे हैं।

ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज माइकल स्नो ने फैसले में कहा कि ऐसा कोई स्वीकार्य सबूत नहीं है जो यह साबित करता हो कि प्रतिवादी ULFA (I) का अध्यक्ष है।

हालांकि ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज माइकल स्नो ने फैसले में कहा कि आरोपी को बरी किया जाना चाहिए क्योंकि मामले में विवरण संतुष्ट नहीं थे। न्यायाधीश ने निष्कर्ष निकाला कि ऐसा कोई स्वीकार्य सबूत नहीं है जो यह साबित करता हो कि प्रतिवादी ULFA (I) का अध्यक्ष है।

न्यायाधीश ने कहा कि मैं यह निष्कर्ष निकालता हूं कि कोई स्वीकार्य सबूत नहीं है, जो आवश्यक पहचान साबित करता हो कि प्रतिवादी ULFA (I) का अध्यक्ष था या उसने प्रशिक्षण शिविर में भाषण दिया था। मैं संतुष्ट हूं कि तथ्य के न्यायाधिकरण, उचित रूप से निर्देशित, यथोचित और सही रूप से यह नहीं साबित करता कि प्रतिवादी साक्ष्य के आधार पर दोषी था। मैं धारा 84(5) 2003 [प्रत्यर्पण] अधिनियम के अनुसार प्रतिवादी को बरी करता हूं।

बता दें कि भारत सरकार के अधिकारियों ने यह आरोप लगाया गया था कि हजारिका को अभिजीत असम के नाम से भी जाना जाता था और वह भारत के अंदर और बाहर ULFA (I) में नए कैडरों की भर्ती में शामिल था। वह भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले शुरू करने के लिए आतंकवादी शिविर आयोजित करता था, जिससे भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का इरादा था।