अजरबैजान घूमने अकेले ही गया था मणिकांत, लापता हुआ, भाई ने मांगी मदद

परिवार ने अजरबैजान में भारतीय दूतावास से संपर्क किया। दूतावास ने कहा कि वह पहाड़ी क्षेत्र में हो सकता है। लेकिन हम ऐसे चुपचाप नहीं बैठ सकते थे। इसलिए हमनें दूतावास में सभी से संपर्क किया, जब तक कि हमें यह नहीं कहा गया कि हम एक खोज दल भेजेंगे।

अजरबैजान घूमने अकेले ही गया था मणिकांत, लापता हुआ, भाई ने मांगी मदद

28 वर्षीय एक युवक की अजरबैजान की एकल यात्रा भारत में मौजूद उसके परिवार के लिए एक बुरे सपने में बदल गई है। मणिकांत कोंडावीती 26 अप्रैल को भारत छोड़कर गया था। अब दो सप्ताह हो चुके हैं और वह लापता है। मणिकांत के परिवार के अनुसार उनकी बेचेनी 12 मई से बढ़नी शुरू हुई, क्योंकि ​मणिकांत ने व्हाट्सएप पर उनके मैसेज का जवाब नहीं दिया।

मणिकांत की अजरबैजान की यात्रा के बारे में बोलते हुए धरन ने कहा कि भाई यात्रा करने का शौकीन है।

मणिकांत का भाई धरन तलाश में है। धरन ने अजरबैजान में मौजूद भारतीय दूतावास से लेकर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और यहां तक की प्रधानमंत्री से भी संपर्क करने की कोशिश की है। धरन ने बताया कि उनका भाई मणिकांत पिछले दो सप्ताह से लापता है। मैं और मेरा परिवार न तो खा पा रहा है और न ही सो रहा है। धरन ने आगे लिखा कि मणिकांत न केवल उसका भाई है, बल्कि उसका सबसे अच्छा दोस्त भी हैं। उसने मुझे क्रिकेट और फुटबॉल खेलना सिखाया।

मणिकांत की अजरबैजान की यात्रा के बारे में धरन ने कहा कि भाई यात्रा करने का शौकीन है। जब मुझे उसकी इस योजना के बारे में पता चला तो सुनकर बहुत अच्छा लगा। इसलिए जब भाई ने मुझसे कहा कि वह अकेला अजरबैजान की यात्रा पर जा रहा है तो मैं उत्साहित था। जाने से एक दिन पहले वह मेरे साथ रहने के लिए दिल्ली आया। हम रात के खाने के लिए गए। अगली सुबह मैंने उसे हवाई अड्डे पर छोड़ दिया और कहा कि अगली बार मैं भी चलूंगा।

26 अप्रैल को भारत छोड़ने के बाद से मणिकांत परिवार को तस्वीरें भेजता था और उन्हें वर्चुअल टूर पर ले जाता था।

26 अप्रैल को भारत छोड़ने के बाद से मणिकांत परिवार को तस्वीरें भेजता था और उन्हें वर्चुअल टूर पर ले जाता था। वे 12 मई तक रोज बातचीत करते थे लेकिन फिर चीजें बदल गईं। 12 मई शाम 7 बजे हमने आखिरी बार उससे बात की थी। मैंने उसे बाद में मैसेज किया लेकिन वह डिलीवर नहीं हुआ। मैंने खुद को यह कहते हुए शांत किया कि शायद उसके मोबाइल में नेटवर्क नहीं होंगे लेकिन मणिकांत से संपर्क करने की कोशिशें दिन-ब-दिन नाकाम होती गईं।

आखिर में परिवार ने अजरबैजान में भारतीय दूतावास से संपर्क किया। दूतावास ने कहा कि वह पहाड़ी क्षेत्र में हो सकता है। लेकिन हम ऐसे चुपचाप नहीं बैठ सकते थे। इसलिए हमनें दूतावास में सभी से संपर्क किया, जब तक कि हमें यह नहीं कहा गया कि हम एक खोज दल भेजेंगे। अगले दिन होटल में मणिकांत का सामान मिला लेकिन मणिकांत का अता पता नहीं चला।

अपने भाई को खोजने के अपने निरंतर प्रयासों के बारे में बोलते हुए धरन कहते हैं कि हमने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सभी से संपर्क किया है। हमने उसकी तस्वीरें भी प्रसारित कीं हैं। हम उसे खोजने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जब भी मां का फोन बजता है, वह सोचती है कि यह वही है। मैं प्रार्थना करता रहता हूं कि भाई फोन करें और कहें मैं यहीं हूं।

धरन ने जनता से एक याचिका पर हस्ताक्षर करके मणिकांत को खोजने में परिवार की मदद करने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने उन लोगों से भी अनुरोध किया है जो अजरबैजान में लोगों को जानते हैं कि वे अपने भाई की तलाश में मदद करें।