लंदन में दी गई 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर और डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 नवंबर 2015 को लंदन में बसवेश्वर की प्रतिमा का अनावरण किया था। इसी दिन उन्होंने डॉ. आंबेडकर के संग्रहालय का उद्घाटन भी किया था। इसी के बाद से दोनों को संयुक्त रूप से याद करने और श्रद्धांजलि अर्पित करने की शुरुआत हुई थी।

लंदन में दी गई 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर और डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि

ब्रिटेन के लिए भारत की उच्चायुक्त गायत्री इस्सर कुमार ने लंदन में सोमवार को भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर और 12वीं सदी के दार्शनिक व समाज सुधारक बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की। यहां बसवेश्वर की 889वीं जयंती मनाई गई। लंदन में स्थित बसवेश्वर प्रतिमा पर आयोजित कार्यक्रम में बसवेश्वर और आंबेडकर को पुष्प अर्पित किए गए।

कार्यक्रम का आयोजन लंबेथ बसवेश्वर संस्था की ओर से किया गया था।

इस कार्यक्रम का आयोजन लंबेथ बसवेश्वर संस्था की ओर से किया गया था। संस्था ने इन दोनों महापुरुषों के बीच वैचारिक संबंध और समानता के कारण इन्हें एक साथ याद करने और श्रद्धांजलि देने का चलन शुरू किया है। बसवेश्वर ने एक जाति रहित समाज बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए थे और वह धार्मिक भेदभाव के धुर विरोधी थे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 नवंबर 2015 को लंदन में बसवेश्वर की प्रतिमा का अनावरण किया था। इसी दिन उन्होंने डॉ. आंबेडकर के संग्रहालय का उद्घाटन भी किया था। इसी के बाद से दोनों को संयुक्त रूप से याद करने और श्रद्धांजलि अर्पित करने की शुरुआत हुई थी।

महाराष्ट्र सरकार ने लंदन में स्थित आंबेडकर हाउस को खरीद कर इसे संग्रहालय में परिवर्तित किया है। यहां डॉ. आंबेडकर 1921-1922 के दौरान निवास करते थे। उस समय वह लंदन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे।

बसवेश्वर ने 12वीं सदी में लोकतंत्र का विचार प्रस्तुत किया था और डॉ. आंबेडकर भारत के संविधान के मुख्य आर्किटेक्ट रहे। दोनों महान अर्थशास्त्री थे। बसवेश्वर राजा बिजाला के राजकोष के प्रभारी थे और आंबेडकर ने प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। समय काल में बड़ा अंतर होने के बाद भी दोनों के विचार बहुत समानता रखते हैं।