यूक्रेन छोड़ने वालों के बीच सेवा के लिए डटा भारत का एक डॉक्टर

डॉ. पृथ्वीराज घोष मूल रूप से भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के रहने वाले हैं। वह पिछले 20 साल से यूक्रेन में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें साल 2014 में रूस और यूक्रेन के बीच हुए संघर्ष का अनुभव है। इसलिए उन्हें पता है कि इन परिस्थिति में क्या करना चाहिए।

यूक्रेन छोड़ने वालों के बीच सेवा के लिए डटा भारत का एक डॉक्टर

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है। ऐसे समय में जब रूसी हमले से बचने के लिए हर कोई यूक्रेन से भागने में लगा है। खुद यूक्रेन के लोग भी संकट की इस घड़ी में अपने देश से निकल रहे हैं। बम के गोलों और मिसाइलों से बचते हुए वे अपने बच्चों को लेकर पड़ोसी देशों में पलायन कर रहे हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में भी कुछ ऐसे लोग भी हैं जो वहां रहकर पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। इन्हीं में एक हैं भारतीय मूल के डॉक्टर पृथ्वीराज घोष। वह आज भी यूक्रेन की राजधानी कीव में डटे हुए हैं और पीड़ितों की सेवा कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले हरियाणा की 17 साल की नेहा ने भी यूक्रेन छोड़ने से इनकार कर दिया था।

डॉ. घोष ने बताया कि उन्होंने राजधानी कीव से लगभग 400 से अधिक भारतीय छात्रों को निकालने में मदद की है।

डॉ. पृथ्वीराज घोष मूल रूप से भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के रहने वाले हैं। वह पिछले 20 साल से यूक्रेन में रह रहे हैं। 37 साल के डॉ. पृथ्वीराज घोष ने बताया कि उन्होंने राजधानी कीव से लगभग 400 से अधिक भारतीय छात्रों को निकालने में मदद की है। उन्होंने भारत लौटने वाले असहाय भारतीय छात्रों के लिए बसों और कारों की व्यवस्था करने में मदद की। इस दौरान वह लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में रहे। गौरतलब है कि घोष यूक्रेन में भारतीयों के बीच एक लोकप्रिय चेहरा हैं। वह एक संगठन भी चलाते हैं जो विदेशी छात्रों को करियर की राह चुनने में मदद करता है। वह उन्हें सही विश्वविद्यालय और पाठ्यक्रम चुनने के लिए सलाह देते हैं। इसलिए छात्र बिरादरी के बीच वह काफी लोकप्रिय हैं।