अफगानिस्तान में भारतीय 'राजनयिकों की वापसी', कैसा रहेगा तालिबान सरकार का रुख?

तैनाती तालिबान द्वारा बार-बार किए गए आश्वासन के बाद ही हुई है कि अगर वे वापस लौटने का फैसला करते हैं तो भारतीय राजनयिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण होगा। वैसे भारत का कहना है कि यह टीम इसलिए भेजी गई है कि वहां भेजी जा रही मानवीय सहायता का लाभ आम लोगों को किस तरह मिल रहा है।

अफगानिस्तान में भारतीय 'राजनयिकों की वापसी', कैसा रहेगा तालिबान सरकार का रुख?
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अफगानिस्तान में पिछले साल 15 अगस्त को तालिबान के शासन के बाद अब जाकर भारत ने काबुल में मौजूद अपने भारतीय दूतावास में एक तकनीकी टीम की तैनाती करने की घोषणा की है। यह तैनाती काबुल में भारतीय दूतावास में भारतीय राजनयिकों की वापसी का प्रतीक है।

Stop Killing Afghan Protest in London
तालिबान द्वारा पिछले साल 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद भारत सरकार ने सभी भारतीय राजनयिकों और अन्य स्टाफ सदस्यों को वापस बुला लिया था। Photo by Ehimetalor Akhere Unuabona / Unsplash

मालूम हो कि इस महीने की शुरुआत में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान की यात्रा पर गया था। इसके बाद भारत सरकार की ओर से काबुल में भारतीय दूतावास में तकनीकी टीम को भेजने का फैसला यह दर्शाता है कि भारत फिर से अफगानिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गया है। हालांकि तकनीकी टीम को भेजने के पीछे सरकार की ओर से वजह बताई गई है कि टीम को इसलिए भेजा जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत तालिबान शासित देश को जो मानवीय सहायता भेज रहा है, वह सही ढंग से पहुंच रही है या नहीं।

तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद भारत सरकार ने सभी भारतीय राजनयिकों और अन्य स्टाफ सदस्यों को वापस बुला लिया था। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ था। भारत सरकार ने एक बयान में कहा कि भारत का अफगान लोगों के साथ एक ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध है। मानवीय सहायता के प्रभावी वितरण के लिए विभिन्न हितधारकों के प्रयासों की बारीकी से निगरानी और समन्वय करने के लिए और अफगान लोगों के साथ हमारे जुड़ाव को जारी रखने के लिए एक भारतीय तकनीकी टीम काबुल पहुंच गई है और उनकी वहां हमारे दूतावास में तैनात की गई है।

तैनाती तालिबान द्वारा बार-बार किए गए आश्वासन के बाद ही हुई है कि अगर वे वापस लौटने का फैसला करते हैं तो भारतीय राजनयिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण होगा। बता दें कि तालिबान अफगानिस्तान को भेजी गई भारत की ओर से मानवीय सहायता की बहुत सराहना करता रहा है। हाल ही में अफगानिस्तान में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने अफगानी नागरिकों के लिए 27 टन आपातकालीन राहत सहायता भेजी। इस भूकंप में 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं।

एक ट्वीट में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आपातकालीन सहायता के प्रेषण को 'एक सच्चा पहला उत्तरदाता' के रूप में वर्णित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह खेप मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) और काबुल में अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी (ARCS) को सौंपी जाएगी। राहत सामग्री में फैमिली रिज टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल और स्लीपिंग मैट जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हमेशा की तरह भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है, जिनके साथ हमारे सदियों पुराने संबंध हैं। हम अफगान लोगों को तत्काल राहत सहायता प्रदान करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।