लंदन में नीलाम हो रही भारतीय कलाकृतियां कुछ अलग हैं, तो क्या हैं?

यह नीलामी 31 मई तक चलेगी और इसमें मधुबनी से लेकर नियो तांत्रिक कला समेत पांच दशक से अधिक पुरानी भारतीय कलाकृतियां शामिल हैं। इस नीलामी में जिन कलाकृतियों की बिक्री हो रही है उनमें प्रतिष्ठित कलाकाल अंबादास खोबरागटे की एक एब्सट्रैक्ट पेंटिंग 'द क्लोज्ड मेंब्रेंस ऑफ सायलेंस' भी शामिल है।

लंदन में नीलाम हो रही भारतीय कलाकृतियां कुछ अलग हैं, तो क्या हैं?

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई का वर्सोवा बीच पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों को भी खूब आकर्षित करता है। करीब छह दशक पहले यह बीच एक कलाकार का भी पसंदीदा स्थान था।1960 के दशक के मध्य में यूरोप में प्रशिक्षित कंटेंपरेरी आर्टिस्ट केके हेब्बार स्थानीय रूप से उगी मेथी खरीदने के लिए अक्सर अपने परिवार के साथ यहां आया करते थे।

ऐसे ही एक मौके पर जर्मनी की एक महिला ने हेब्बार को ललित कला अकादमी के एक निमंत्रण कार्ड के पीछे बीच का एक चित्र बनाते हुए देखा। वह चित्र बाद में एक बेनाम कैनवस पर पहुंचा जो अब जर्मनी की ऑक्टोजिनेरियन उटे रेटबर्ग के पास मौजूद उन 80 से अधिक भारतीय कलाकृतियों में शामिल है, जिनकी लंदन में हो रही नीलामी में बिक्री की जा रही है। यह नीलामी 31 मई तक चलेगी और इसमें मधुबनी से लेकर नियो तांत्रिक कला समेत पांच दशक से अधिक पुरानी भारतीय कलाकृतियां शामिल हैं।

यहां तांत्रिक कला समेत पांच दशक से अधिक पुरानी भारतीय कलाकृतियां शामिल हैं।


उटे रेटबर्ग 1960 के दशक के मध्य में मुंबई (तब बॉम्बे) आई थीं। वह जर्मन महावाणिज्य दूतावास में पहली महिला के तौर पर यहां आई थीं और 1970 के दशक में भारत से गई थीं। इसके साथ ही वह उन पहले विदेशी गैलरिस्ट्स में से एक थीं जिन्होंने लगभग एक दशक तक भारतीयों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार को विस्तारित किया।

1973 में फ्रैंकफर्ट के पास फ्रेनशाइम में अपने घर लौटने के बाद उटे ने सूर्या गैलरी (Surya Galarie) की शुरुआत की। यह यूरोप में अपनी तरह की पहली गैलरी थी जो कंटेंपरेरी भारतीय कलाकारों के विविध और रंग पूर्ण कार्यों को प्रदर्शित करती थी। इस नीलामी में जिन कलाकृतियों की बिक्री हो रही है उनमें प्रतिष्ठित कलाकाल अंबादास खोबरागटे की एक एब्सट्रैक्ट पेंटिंग 'द क्लोज्ड मेंब्रेंस ऑफ सायलेंस' भी शामिल है।