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'खालिस्तान' के एजेंडे को कनेक्टिकट विधानसभा का समर्थन, विरोध में आए कई भारतीय-अमेरिकी संगठन

भारतीय-अमेरिकी समूह और शक्तिशाली समुदाय के नेता कनेक्टिकट स्टेट असेंबली के सदस्यों और उसके नेतृत्व को पत्र लिख रहे हैं जिसमें यह रेखांकित किया गया है कि इस तरह का उद्धरण भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल उठाता है और बढ़ते भारत-अमेरिका संबंधों को कमजोर करता है।

भारतीय अमेरिकी समूहों ने तथाकथित सिख स्वतंत्रता की घोषणा की वर्षगांठ को मान्यता देने वाले अमेरिकी राज्य कनेक्टिकट की आम सभा द्वारा जारी एक प्रशस्ति पत्र को रद्द करने का आग्रह किया है। दरअसल 29 अप्रैल को आधिकारिक प्रशस्ति पत्र में कनेक्टिकट महासभा ने खालिस्तान समर्थक संगठन विश्व सिख संसद को सिख स्वतंत्रता की घोषणा की 36वीं वर्षगांठ की मान्यता में बधाई दी थी।

भारतीय-अमेरिकी समूह और शक्तिशाली समुदाय के नेता कनेक्टिकट स्टेट असेंबली के सदस्यों और उसके नेतृत्व को पत्र लिख रहे हैं जिसमें यह रेखांकित किया गया है कि इस तरह का उद्धरण भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल उठाता है और बढ़ते भारत-अमेरिका संबंधों को कमजोर करता है। कनेक्टिकट के मिलान सांस्कृतिक संघ ने कहा यह उद्धरण हमारे कनेक्टिकट के हित के लिए हानिकारक होगा। यह उद्धरण कनेक्टिकट प्रशासन द्वारा एक अत्यधिक निंदनीय कदम है और बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। इसलिए हम आपसे इस उद्धरण को रद्द करने का आग्रह करते हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (FIA) ओहियो ने कहा कि कनेक्टिकट स्टेट असेंबली का प्रशस्ति पत्र जारी करने का निर्णय एक गैर-जिम्मेदाराना काम है। हमने कनेक्टिकट राज्य की महासभा द्वारा सिख स्वतंत्रता पर बधाई देने वाले एक प्रशस्ति पत्र पर ध्यान दिया है। गैर-जिम्मेदार अधिनियम भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल उठाता है और उन ताकतों को भरोसा देता है जो भारत के टुकड़े करना चाहते हैं। यह कनेक्टिकट के लोगों की इच्छा कभी नहीं हो सकती है।

एफआईए न्यू इंग्लैंड ने इस मसले पर कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उद्धरण कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गलत सूचना के आधार पर जारी किया गया है। यह कनेक्टिकट की अगस्त महासभा का दुरुपयोग है।

न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और कनेक्टिकट के संगठन एफआईए ट्राई-स्टेट ने कनेक्टिकट की महासभा के निर्वाचित सदस्यों से विध्वंसक गतिविधियों का समर्थन करने के इस नाजायज कृत्य को तुरंत सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। एफआईए के अध्यक्ष अंकुर वैद्य ने आशा व्यक्त की कि तथ्यों की जांच की जाएगी और कनेक्टिकट की महासभा के सामने सच्चाई सभी के सामने आएगी। उन्होंने कहा कि स्वार्थी छिपे हुए एजेंडे के साथ विभाजनकारी तत्वों द्वारा इस तरह की घृणित और निंदनीय कार्रवाई की सामूहिक और कड़ी निंदा की जानी चाहिए।

न्यूयॉर्क में एसोसिएशन आफ इंडियन इन अमेरिका ने कहा कि य​ह उद्धरण भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का अपमान है। तथाकथित उद्धरण और कुछ नहीं बल्कि धार्मिक आधार पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय में विभाजन बोने और कनेक्टिकट की महासभा के मंच के साथ छेड़छाड़ करने का एक नापाक प्रयास है। बयान में कहा गया कि हम सांसदों से उद्धरण वापस लेने की पुरजोर अपील करते हैं।

अमेरिकन इंडियन पब्लिक अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेवानी ने कहा कि यह उद्धरण बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि भारत में अलगाववादी आंदोलन का समर्थन करने का यह गैर-जिम्मेदाराना कृत्य बिल्कुल अस्वीकार्य है। अमेरिका, सबसे पुराना लोकतंत्र और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है। दोनों देश बहुत करीबी और रणनीतिक संबंध साझा करते हैं।

ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन फॉर पीपल ऑफ इंडियन ओरिजिन (GOPIO) इंटरनेशनल के अध्यक्ष थॉमस अब्राहम ने कनेक्टिकट असेंबली को एक बयान देने का आह्वान किया जो खुद को प्रशस्ति पत्र से अलग करता है। उन्होंने कहा कि इस बिंदु पर हमारे राज्य का हित भारतीय व्यवसायों और प्रौद्योगिकी से संबंधित कंपनियों को अपने राज्य में अपने संगठन शुरू करने के लिए आकर्षित करना है ताकि राज्य में रोजगार पैदा हो सके। कनेक्टिकट की यह सार्वजनिक छवि भारत विरोधी है। हम अनुरोध करते हैं कि आप इस उद्धरण से अलग होने के लिए एक सार्वजनिक बयान जारी करें।

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