न्यूयॉर्क शहर में भारतीय इसलिए मिल-जुलकर मनाएंगे 'यीशु भक्ति दिवस'

3 जुलाई को पहली बार भारतीय ईसाई दिवस या यीशु भक्ति दिवस मनाने के लिए एक अंतरजातीय समूह एक साथ आया है। इस कार्यक्रम के लिए न्यूयॉर्क शहर के एलमोंट में सेंट विंसेंट डी पॉल सिरो-मलंकारा कैथोलिक कैथेड्रल को चुना गया है।

न्यूयॉर्क शहर में भारतीय इसलिए मिल-जुलकर मनाएंगे 'यीशु भक्ति दिवस'
Photo by Paul Zoetemeijer / Unsplash

भारतीय अमेरिकी समुदाय में बहु-सांस्कृतिक कार्यक्रमों को मिल-जुलकर मनाने का चलन रहा है। भारतीय मूल के ईसाई अमेरिका में मुस्लिम और हिंदू समुदायों के साथ आगे बढ़ते हैं, कार्यक्रम एक साथ आयोजित करते हैं और मिलकर जश्न मनाते हैं। पिछले दो दशकों में राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी भी हैं।

कुछ ऐसे ही 3 जुलाई को पहली बार भारतीय ईसाई दिवस या यीशु भक्ति दिवस मनाने के लिए एक अंतरजातीय समूह एक साथ आया है। इस कार्यक्रम के लिए न्यूयॉर्क शहर के एलमोंट में सेंट विंसेंट डी पॉल सिरो-मलंकारा कैथोलिक कैथेड्रल को चुना गया है। हालांकि यह तारीख इसलिए तय की गई है क्योंकि यह ईसा मसीह के शिष्य सैंट थॉमस के शहादत दिवस को चिह्नित करती है, जिन्हें 72 ईस्वी में चेन्नई में मौत के घाट उतार दिया गया था।

भारत में ईसाई उस दिन को सेंट थॉमस डे-थॉमस द एपोस्टल के रूप में मनाते हैं। सैंट थॉमस के बारे में माना जाता है कि वह 52 ईस्वी में भारत में यीशु मसीह के सुसमाचार को लाए थे। आयोजन के संस्थापकों द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 2021 में इस दिन को चिह्नित करते हुए ​हम हर साल यीशु के अनुयायियों के रूप में भारत की सांस्कृतिक विरासत के भीतर अपनी पहचान को संरक्षित कर सकते हैं। इस मौके पर हम उन सभी को साथ ला सकते हैं जो इस कार्यक्रम को मनाने के इच्छुक हैं। भले ही भाषा, रीति-रिवाज, पंथ, क्षेत्र या धर्म उनका अलग ही क्यों न हो। यह दुनिया भर में भारत में ईसाई धर्म की विरासत और विरासत का जश्न मनाने का दिन है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि भारतीय ईसाई दिवस इस बात पर जोर देने के लिए भी बनाया गया है कि ईसाई धर्म भारत के लिए एक विदेशी धर्म नहीं है। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के पूर्व प्रवक्ता फादर बाबू जोसेफ ने कहा कि  यह भारत के इतिहास और लोकाचार के हिस्से के रूप में ईसाई धर्म को मान्यता देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा यह धारणा बनाने के प्रयासों के आलोक में कि ईसाई धर्म भारत के लिए विदेशी है देश में इसकी प्राचीनता को उजागर करना आवश्यक है।

इस आयोजन के संस्थापकों में से एक कैलिफोर्निया के जॉन मैथ्यू ने कहा कि लगभग 2000 वर्षों से यीशु के अनुयायी भारत में प्रेम, शांति और सद्भाव में रहे हैं और आधुनिक समय के परिवर्तन में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण आदि के माध्यम से भारत में सक्रिय भूमिका निभाई है। भारत में ईसाई धर्म के इतिहास और विरासत की सच्चाई का जश्न मनाने के लिए सभी संप्रदायों और पृष्ठभूमि के भारतीय ईसाइयों को एक साथ देखना वास्तव में एक सुंदर बात है।