स्कूल में ऐसे सिस्टम को देख भारतीय मूल की रेशमा ने चुना संघर्ष का रास्ता

रेशमा ने 2012 में गर्ल्स हू कोड संस्था शुरू करने का फैसला किया। जो लड़कियों और युवा महिलाओं को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी होने के लिए तैयार करता है। 6 वर्षीय रेशमा का कहना है कि मैं परिसर में लौटने और स्नातक वर्ग की छात्राओं की बहादुरी और दृढ़ संकल्प से प्रेरित होने के लिए रोमांचित हूं।

स्कूल में ऐसे सिस्टम को देख भारतीय मूल की रेशमा ने चुना संघर्ष का रास्ता

भारतीय मूल की अमेरिकी वकील और सामाजिक कार्यकर्ता रेशमा सौजानी इस साल 'कक्षा दिवस' पर 22 मई को येल कॉलेज को संबोधित करेंगी। रेशमा ने इसी कॉलेज से साल 2002 में कानून से स्नातक किया है। वह 'गर्ल्स हू कोड' की संस्थापक हैं। महिलाओं और लड़कियों के आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण से जुड़े आंदोलनों पर उन्होंने 10 साल तक काम किया है। रेशमा सौजानी अपने पति निहाल और दो बेटों शान और साईं के साथ न्यूयॉर्क शहर में रहती हैं।

रेशमा ने कहा कि मैं परिसर में लौटने और स्नातक वर्ग की छात्राओं की बहादुरी से प्रेरित होने के लिए रोमांचित हूं। 

इस कार्यक्रम को लेकर 46 वर्षीय रेशमा का कहना है कि मैं परिसर में लौटने और स्नातक वर्ग की छात्राओं की बहादुरी और दृढ़ संकल्प से प्रेरित होने के लिए रोमांचित हूं। उन्होंने कहा कि हम इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड पर खड़े हैं। महामारी के बाद की दुनिया के लिए हमारी व्यवस्था और संरचनाओं को फिर से बनाने के लिए हमारे पास व्यापार, संस्कृति और वकालत को मौलिक रूप से फिर से परिभाषित करने का अवसर है। मैं पहले से ही येल के स्नातकों को आगे बढ़ते हुए देख रही हूं। अपने, देश और अपनी दुनिया के लिए बेहतर भविष्य की मांग कर रही हूं। उनके साथ जश्न मनाना सम्मान की बात है।

अपनी एक फेसबुक पोस्ट में रेशमा ने लिखा है कि वह बचपन से ही येल की डिग्री चाहती थीं। यहां प्रवेश के लिए उन्होंने तीन बार आवेदन किया था। उनका मानना है कि येल लॉ स्कूल बाहर से आने वाले छात्रों के लिए होना चाहिए। बतौर पहली पीढ़ी की अमेरिकी जिनके माता-पिता युगांडा से भारतीय शरणार्थी थे, रेशमा इलिनोइस में पली-बढ़ीं। येल लॉ स्कूल से स्नातक की डिग्री हासिल करने से पहले वह इलिनोइस विश्वविद्यालय (राजनीति विज्ञान में प्रमुख) और हार्वर्ड के कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

उन्होंने 2012 में गर्ल्स हू कोड संस्था शुरू करने का फैसला किया। 

वर्ष 2010 में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के लिए अभियान में हिस्सा लिया। न्यूयॉर्क के 14वें जिले के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा सीट के लिए प्रचार किया। बाद में उन्होंने न्यूयॉर्क शहर के डिप्टी पब्लिक एडवोकेट के रूप में काम किया। राजनीतिक अभियान के दौरान रेशमा ने स्थानीय स्कूलों का दौरा करते हुए कंप्यूटिंग कक्षाओं में लैंगिक असंतुलन देखा। इसके बाद उन्होंने 2012 में गर्ल्स हू कोड संस्था शुरू करने का फैसला किया। जो लड़कियों और युवा महिलाओं को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी होने के लिए तैयार करता है। दस साल बाद, संगठन ने 5 लाख से अधिक लड़कियों को पढ़ाया है। गर्ल्स हू कोड, 2030 तक नई प्रौद्योगिकी में नौकरियों में लिंग भेद को बंद करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।