रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर करीब आए भारत-ब्रिटेन

वार्ता में अप्रैल 2018 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा किए गए साइबर संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर भी चर्चा की गई और अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए यूके-भारत साइबर संबंधों को लेकर क्या रणनीति होगी इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया।

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर करीब आए भारत-ब्रिटेन
लंदन में वार्षिक साइबर वार्ता में भारतीय प्रतिनिधि, मुआनपुई सैयावी और यूके के समकक्ष विल मिडलटन। (फोटो: ट्विटर)

मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष के बावजूद भारत और यूके के बीच संबंधों में सुधार हुआ है। दोनों देशों ने 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को लंदन में अपनी वार्षिक साइबर वार्ता आयोजित की। दोनों देशों ने साइबर गर्वनेंस में पर्याप्त सहयोग की सराहना की साथ ही स्थिरता और सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक उपाय करने का फैसला किया।

वार्ता में अप्रैल 2018 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा किए गए साइबर संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर भी चर्चा की गई और अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए यूके-भारत साइबर संबंधों को लेकर क्या रणनीति होगी, इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया। कोरोना महामारी के चलते यह आयोजन तीन साल बाद किया गया। यूके सरकार के अनुसार वार्षिक रिपोर्ट प्रगति संवाद यानी एनुअल रिपोर्ट प्रोग्रेस डायलॉग यूके में साल 2019 की शुरुआत में होने वाला था।

वार्ता में यूके-भारत साइबर संबंधों की रणनीति पर भी चर्चा हुई। 

इस वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय (MEA) में साइबर डिप्लोमेसी डिवीजन की संयुक्त सचिव मुआनपुई सैयावी ने किया, जबकि ब्रिटेन के समकक्ष का प्रतिनिधित्व राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय के साइबर निदेशक विल मिडलटन ने किया था। सैयावी ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तरों पर सहयोग को मजबूत करने के लिए 9 अप्रैल को जर्मनी के सूचना सुरक्षा संघीय कार्यालय के अध्यक्ष अर्ने शोनबोहम से भी मुलाकात की। वार्षिक साइबर संवाद में कई सरकारी मंत्रालयों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि इससे पहले चौथी यूके-भारत साइबर वार्ता जून 2018 में भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। इस सत्र के दौरान दोनों देशों के बीच इंटरनेशनल इंटरनेट गर्वनेंस जैसे मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा की गई थी।