67 करोड़ से अधिक होगी भारत में शहरी आबादी, लेकिन चीन से कम, क्यों?

संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट में कहा है कि 2035 में भारत की शहरी आबादी 67 करोड़ 50 लाख होने का अनुमान है जो चीन की 100 करोड़ की शहरी आबादी के बाद दूसरी बड़ी आबादी होगी। एशिया में पिछले दो दशकों में चीन और भारत में तेजी से आर्थिक विकास व शहरीकरण हुआ, जिससे गरीबों की संख्या में भारी कमी आई है।

67 करोड़ से अधिक होगी भारत में शहरी आबादी, लेकिन चीन से कम, क्यों?
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वर्ष 2035 में भारत की शहरी आबादी 67 करोड़ 50 लाख होने का अनुमान है। हालांकि भारत की शहरी आबादी उस वक्त भी चीन से कम ही होगी। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के बाद वैश्विक शहरी आबादी बढ़ने की राह पर है। 2050 तक यह 2.2 अरब यानी लगभग 220 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

More than 1 million marched in protest against controversial extradition bill, 09/06/2019
2035 में चीन की शहरी आबादी 1.05 अरब यानी लगभग 100 करोड़ होने का अनुमान है। Photo by Joseph Chan / Unsplash

संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2022 में कहा गया है कि तेजी से शहरीकरण केवल अस्थायी रूप से कोरोना महामारी से विलंबित था। लेकिन अब अनुमान है कि वैश्विक शहरी आबादी 2050 तक 2.2 अरब पहुंचेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की शहरी आबादी 2035 में 67,54,56,000 होने का अनुमान है जो 2020 में 48,30,99,000 थी। यह 2025 में बढ़कर 54,27,43,000 और 2030 में 60,73,42,000 हो जाएगी। यह भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 43 फीसद होगा।

2035 में चीन की शहरी आबादी 1.05 अरब यानी लगभग 100 करोड़ होने का अनुमान है जबकि पूरे दक्षिण एशिया में 98,75,92,000 होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और भारत जैसी बहुत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है और उनके विकास पथ ने वैश्विक असमानता को बहुत प्रभावित किया है।

एशिया में पिछले दो दशकों में चीन और भारत में तेजी से आर्थिक विकास और शहरीकरण हुआ है जिससे गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा शहरी आबादी बढ़ती जन्म दर के माध्यम से स्वाभाविक रूप से बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से कम आय वाले देशों में शहरी आबादी 2021 में जो 56 फीसदी है वह बढ़कर 2050 तक 68 फीसदी होने का अनुमान है।

यूएन-हैबिटेट के यूएन अंडर सेक्रेटरी जनरल और कार्यकारी निदेशक मैमुनाह मोहम्मद शरीफ ने कहा कि शहरीकरण 21वीं सदी में एक शक्तिशाली मेगा-ट्रेंड है। इसमें कई चुनौतियां भी शामिल हैं जिन्हें महामारी ने और उजागर किया और बढ़ा दिया। लेकिन लोगों में आशा है कि कोरोना ने उन्हें अलग तरह से निर्माण करने का अवसर दिया है। सही नीतियों और सरकारों की सही प्रतिबद्धता के साथ हमारे बच्चे शहरी भविष्य को विरासत में प्राप्त कर सकते हैं जो अधिक समावेशी, हरित, सुरक्षित और स्वस्थवर्धक हो।