भारत में आदिवासी संस्कृति का जीवंत स्थल बनेगा बिरसा स्मृति उद्यानः मोदी

प्रधानमंत्री ने देश के इतिहासकारों का आह्वान किया कि वे बिरसा मुंडा, बाबा तिलका मांझी, सिद्धो-कान्हू, तेलंगा खड़िया जैसे आदिवासी योद्धाओं और विभूतियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से जुड़े इतिहास का पुनर्लेखन करें।

भारत में आदिवासी संस्कृति का जीवंत स्थल बनेगा बिरसा स्मृति उद्यानः मोदी
संसद भवन परिसर में बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटोः राजीव भट्ट

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रांची राज्य में स्थापित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय को वर्चुअली दिल्ली से राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय भगवान बिरसा मुंडा सहित भारत के कोटि-कोटि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को समर्पित है। 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती है और इसे हमने जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि रांची का यह संग्रहालय स्वाधीनता संग्राम में आदिवासी नायक-नायिकाओं के योगदान का और विविधताओं से भरी हमारी आदिवासी संस्कृति का जीवंत अधिष्ठान बनेगा। (बिरसा मुंडा स्वतंत्रता सैनानी व आदिवासी जननायक थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ मोर्चा लिया। आदिवासी उन्हें भगवान समकक्ष मानते हैं।)

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की लड़ाई जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए थी। फोटोः राजीव भट्ट

नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की एवं यहां से वर्चुअली रांची में स्थापित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके बाद वह भोपाल गए जहां उन्होंने जनजातीय गौरव महासम्मलेन में हिस्सा लिया।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की लड़ाई जल, जंगल और जमीन की रक्षा और भारत की आजादी के लिए थी। उनके संघर्ष के सामने अंग्रेजों ने भी घुटने टेक दिए। उन्होंने कहा कि जहां बिरसा के कदम पड़े हों, वह हम सबके लिए पवित्र तीर्थ है। भारत की पहचान और भारत की आजादी के लिए लड़ते हुए भगवान बिरसा मुंडा ने अपने आखिरी दिन रांची की इसी जेल में बिताए थे।