कुपोषण से जंग और खाद्य सुरक्षा पर भारत ने किए बड़े काम, UN ने की तारीफ

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गरीबी मिटाने के लिए भारत की तारीफ करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दिशा में सरकार ने कई बड़े कार्यक्रम शुरू किए हैं। देश में खाद्यान्न उत्पादन 5 गुना हो गया है। पहले भारत को खाद्य सहायता पर निर्भर रहना पड़ता था, अब वह अनाज का निर्यातक बन चुका है।

कुपोषण से जंग और खाद्य सुरक्षा पर भारत ने किए बड़े काम, UN ने की तारीफ
Photo by Mathias Reding / Unsplash

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कुपोषण के मोर्चे पर भारत ने काफी अच्छा काम किया है। कुपोषण दर में सुधार के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। पिछले 15 वर्षों में भारत में कुपोषित लोगों की संख्या घटकर 224.3 मिलियन रह गई है। भारत में 5 साल से कम उम्र के अविकसित बच्चों की संख्या भी 2006 से 2016 के बीच 48 प्रतिशत से कम होकर 38 प्रतिशत हो गई है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में दुनिया भर में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 828 मिलियन हो गई। Photo by Aravind Kumar / Unsplash

खाद्य सुरक्षा एवं पोषण पर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (FAO), कृषि विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कोष (IFAD), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की तरफ से संयुक्त रूप से जारी रिपोर्ट में ये बातें बताई गई हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में दुनिया भर में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 828 मिलियन हो गई। 2020 के मुकाबले इसमें 46 फीसदी का इजाफा हुआ है। कोरोना महामारी फैलने के बाद से 150 मिलियन लोग भुखमरी की चपेट में आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2019-21 में अल्पपोषित लोगों की संख्या घटकर 224।3 मिलियन रह गई, जो 2004-06 में 247।8 मिलियन थी।

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गरीबी मिटाने के लिए भारत की तारीफ करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दिशा में सरकार ने कई बड़े कार्यक्रम शुरू किए हैं। देश में खाद्यान्न उत्पादन 5 गुना हो गया है। 1950-51 में जहां 50 मिलियन टन अनाज उत्पादन होता था, वह 2014-15 में बढ़कर लगभग 250 मिलियन टन हो गया है। पहले भारत को खाद्य सहायता पर निर्भर रहना पड़ता था, अब वह अनाज का निर्यातक बन चुका है।

वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए भारत सरकार ने 2016 में कई योजनाएं शुरू कीं। ये कृषि उत्पादन बढ़ाने में आने वाली समस्याओं, खासकर वर्षा आधारित क्षेत्रों में की बाधाओं को दूर करने के मकसद से शुरू की गई थीं। इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, तिलहन, दलहन, ताड़ के तेल और मक्का पर एकीकृत योजनाएं (ISOPOM), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-मार्केटप्लेस शामिल हैं। इसके अलावा सिंचित क्षेत्र बढ़ाने के भी कार्यक्रम चलाए गए।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए पिछले दो दशकों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें स्कूलों में मिड-डे मील की शुरुआत, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आंगनवाड़ी सिस्टम के जरिए राशन देना और गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराना भी शामिल है।