भारत ने गेहूं का निर्यात तो रोका, लेकिन दिल खोलकर अपनों को मदद जारी रखी

मई में भारत ने भीषण गर्मी के कारण गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की चिंताओं के बीच घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लग गई थी। सरकार के केंद्रीय खाद्य सचिव सुंधाशु पांडे के अनुसार 13 मई से अब तक ऐसे देशों को 18 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है जिन्हें वास्तविक जरूरत है।

भारत ने गेहूं का निर्यात तो रोका, लेकिन दिल खोलकर अपनों को मदद जारी रखी
Photo by Anurag Gautam / Unsplash

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच दुनिया का सबसे बड़ा गेंहू उत्पादक देश भारत प्रतिबंधों के बाद भी विश्व के लिए खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान दे रहा है।  भारत ने अपने पड़ोसियों और खाद्य समस्या से जूझ रहे देशों की वास्ताविक जरूरतों को पूरा किया है।

बता दें कि मई माह में भारत ने भीषण गर्मी के कारण गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की चिंताओं के बीच घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। दूसरी ओर भारत के अलावा रूस और यूक्रेन भी हैं जो गेंहू के प्रमुख निर्यातक हैं। दोनों ही देशों ने युद्ध के कारण निर्यात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

भारत सरकार के केंद्रीय खाद्य सचिव सुंधाशु पांडे ने बताया कि भारत ने मानवीय आधार पर कई देशों को गेंहू सहित खाद्यान्न की आपूर्ति जारी रखी है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत ने 13 मई से अब तक ऐसे देशों को 18 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है जिन्हें वास्तविक जरूरत है। बर्लिन में 'यूनाइटिंग फॉर ग्लोबल फूड सिक्योरिटी' पर एक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में पांडे ने कहा कि पिछले साल भारत ने रिकॉर्ड सात मिलियन (70 लाख) टन गेहूं का निर्यात किया था। जबकि आमतौर पर हम लगभग दो मिलियन टन का निर्यात करते हैं जो कि वैश्विक गेहूं व्यापार का लगभग 1 फीसदी है।

गौरतलब है कि इस वित्तीय वर्ष में 22 जून तक विनियमन के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, इजराइल, इंडोनेशिया, मलेशिया, नेपाल, ओमान, फिलीपींस, कतर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, यूएई, वियतनाम और यमन को 1.8 मिलियन (18 लाख) टन गेहूं भेजा गया है।

मालूम हो कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालीना जॉर्जीवा ने मई के आखिर में भारत से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध के अपने फैसले को लेकर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था और कहा था कि भारत अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।