संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए भारत के प्रयास लगातार जारी हैं

संयुक्त राष्ट्र की अपनी हिंदी वेबसाइट तो है ही साथ ही सोशल मीडिया हैंडल भी हिंदी में उपलब्ध हैं। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर संयुक्त राष्ट्र के हिंदी अकाउंट उपलब्ध हैं। ट्विटर पर 'यूएन इन हिंदी', इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 'यूनाइटेड नेशंस हिंदी' नाम से हैंडल मौजूद हैं।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए भारत के प्रयास लगातार जारी हैं
संयुक्त राष्ट्र अधिकारी को चेक सौंपते भारतीय राजदूत आर रविंद्र।

संयुक्त राष्ट्र में भारत देश की राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी प्रयास के तहत बुधवार को भारत ने संयुक्त राष्ट्र मीडिया डिविजन को 8 लाख डॉलर (6.18 करोड़ रुपये) का चेक सौंपा है। यह आर्थिक मदद खासकर हिंदी एट यूएन प्रोजेक्ट के लिए दी गई है, जिसकी शुरुआत 2018 में की गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य दुनियाभर में हिंदी भाषी लोगों तक संयुक्त राष्ट्र से संबंधित जानकारी पहुंचाना है।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत ने पूरी ताकत झोंक दी है और इसी का परिणाम है कि 2018 में संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक सूचना विभाग के सहयोग से हिंदी एट यून प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की जानकारी हिंदी भाषा में लोगों तक पहुंचाना और साथ ही दुनिया के करोड़ों हिंदी भाषी लोगों को वैश्विक मुद्दों के बारे में जागरूक करना है। वहीं, हिंदी भाषा में संयुक्त राष्ट्र के समाचार, फोटो और वीडियो को मुख्यधारा में लाने और उसका प्रसार करने के लिए भारत 2018 से संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग को विशेष आर्थिक योगदान देना रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की अब हिंदी की अपनी वेबसाइट तो है ही साथ ही, सोशल मीडिया हैंडल भी हिंदी में उपलब्ध हैं। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर संयुक्त राष्ट्र के हिंदी अकाउंट उपलब्ध हैं। ट्विटर पर 'यूएन इन हिंदी', इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 'यूनाइटेड नेशंस हिंदी'  नाम से हैंडल मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों की जानकारी यहां हिंदी में नियमित रूप से दी जा रही हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र प्रत्येक सप्ताह हिंदी में ऑडियो बुलेटिन (यून रेडियो) पर प्रसारित करता है। इस प्रयास में भारत का अहम भूमिका है।

उल्लेखनीय है कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकृति दिलाने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है। भारत सरकार का कहना है कि इसे स्वीकृति तब मिल सकती है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में इससे संबंधित प्रस्ताव को दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो।