स्टैन स्वामी की मौत की स्वतंत्र जांच हो, अमेरिकी संसद में विधेयक पेश किया

फादर स्टैन की मृत्यु को लेकर भारत ने अपना रुख पिछले साल ही स्पष्ट कर दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर कहा था कि इस मामले में सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था।

स्टैन स्वामी की मौत की स्वतंत्र जांच हो, अमेरिकी संसद में विधेयक पेश किया

मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले भारतीय कार्यकर्ता फादर स्टैन (Father Stan) की मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए अमेरिकी संसद में स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई जा रही है। कैलिफोर्निया राज्य से सांसद हुआन वारगास का कहना है कि इस मसले पर एक विधेयक भी अमेरिका की संसद में पेश किया गया है।

वारगास ने बताया कि संसद में हाल ही में फादर स्टैन की मौत की स्वतंत्र जांच कराने के लिए एक विधेयक पेश किया गया था। इसमें फादर स्टैन के सम्मान में कुछ कदम उठाने का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव को प्रतिनिधि आंद्रे कार्सन व जेम्स मैक्गवर्न ने संसद में इस विधेयक के प्रति समर्थन व्यक्त किया था।

मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पिछले साल जुलाई में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि इस तरह की सभी कार्रवाइयां कानून के तहत ही की जाती हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता वारगासने मंगलवार को आयोजित हुई एक वेबिनार में यह जानकारी साझा की। इस वेबिनार का आयोजन फादर स्टैन की हिरासत में हुई मौत की स्मृति में की गई थी। उल्लेखनीय है कि इसका विषय 'भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनकी सुरक्षा करने वालों के उत्पीड़न' पर आधारित था।

बता दें कि हुआन वारगास के अलावा इस वेबिनार में ब्रिटेन के सांसद नील हैन्वे, यूरोपीय संसद की सदस्य (MEP) अल्वीना एलामेत्सा, ऑस्ट्रेलिया के. सीनेटर डेविड शूब्रिज और संयुक्त राष्ट्र (UN) की विशेष प्रतिवेदक मैरी लॉलर ने भी संबोधित किया था। यहां पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्वामी के अथक प्रयासों को स्वीकार किया गया।

इस कार्यक्रम को लेकर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पैनलिस्ट्स ने कहा कि हम उस उत्पीड़न को लेकर बहुत शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं जिसका सामना फादर स्टैन को हिरासत में रहने के दौरान करना पड़ा था। बयान में कहा गया कि मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को ऐसी हिंसा और उपेक्षा का सामना नहीं करना चाहिए।

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, द ह्यूमनिज्म प्रोजेक्ट, इंडिया सिविल वॉच इंटरनेशनल और सर्वाइवल इंटरनेशनल इस वेबिनार के सह आयोजक थे। इसके अलावा आदिवासी लाइव्स मैटर, दलित सॉलिडेरिटी फोरम, फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन क्रिश्चियन ऑर्गेनाइजेशंस ऑफ नॉर्थ अमेरिका और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल इसके सह स्पॉन्सर थे। फादर स्टैन स्वामी की मौत पिछले साल 29 मई को मुंबई के एक अस्पताल में हो गई थी। एक दिन पहले उन्हें कार्डिएक अरेस्ट का सामना करना पड़ा था और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। वह पर्किंसन समेत कई अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से पीड़ित थे। उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अक्तूबर 2020 में गैरकानूनी गतिविधि विरोधी कानून (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया था।

उन्हें एल्गार परिषद मामले से संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और नवी मुंबई में स्थित तलोजा सेंट्रल जेल में रखा गया था। उल्लेखनीय है कि एल्गार परिषद मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित किए गए एक सम्मेलन के दौरान यहां पर कुछ कार्यकर्ताओं की ओर से कथित तौर पर भड़काऊ और आपत्तिजनक भाषण दिए जाने से जुड़ा हुआ है।

बता दें कि फादर स्टैन की मृत्यु को लेकर भारत ने अपना रुख पिछले साल ही स्पष्ट कर दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर कहा था कि इस मामले में सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था। हमारे अधिकारी कानून का उल्लंघन किए जाने पर कार्रवाई करते हैं और अधिकारों के वैध अभ्यास पर किसी तरह की कोई रोक या प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है।

मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पिछले साल जुलाई में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि इस तरह की सभी कार्रवाइयां कानून के तहत ही की जाती हैं। वह स्टैन की मौत को लेकर आ रही प्रतिक्रियाओं को लेकर मीडिया के सवालों के उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि स्टैन स्वामी के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनका इलाज एक निजी अस्पताल में कराने की अनुमति दी थी।

बागची ने कहा था कि इसके बाद 28 मई से उन्हें हर संभव मेडिकल अटेंशन मिलने लगा था। उन्होंने आगे कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश है जहां एक स्वतंत्र न्यायपालिका और कई राष्ट्र व राज्य स्तरीय आयोग हैं जो मानवाधिकारों के उल्लंघन पर रखते हैं। भारत अपने सभी नागरिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा करने और उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उल्लेखनीय है कि अमे्रिका की संसद में यह प्रस्ताव पेश किए जाने से पहले संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार इकाई ने भी फादर स्टैन स्वामी की मृत्यु पर सवाल खड़े किए थे। इसने कहा था कि हम मामले में सुनवाई होने से पहले ही पुलिस की हिरासत में हुई मानवाधिकार कार्यकर्ता की मौत से बहुत दुखी और आहत हैं।