अटलांटा में सद्गुरु के मिट्टी बचाओ आंदोलन से जुड़े सैकड़ों बच्चे, बुजुर्ग, जवान

वर्तमान में 50 फीसदी अमेरिकी व 75 फीसदी यूरोपीय मिट्टी में पर्याप्त जैविक सामग्री का अभाव है। दुनिया अब जितना उत्पादन कर रही है उसकी तुलना में 2045 तक 40 फीसदी कम भोजन का उत्पादन करेगी। 'सेव सॉयल' वैश्विकसद्गुरु द्वारा शुरू की गई एक पहल है। इस आंदोलन को दुनिया भर से समर्थन मिला है।

अटलांटा में सद्गुरु के मिट्टी बचाओ आंदोलन से जुड़े सैकड़ों बच्चे, बुजुर्ग, जवान

भारत की ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू जग्गी वासुदेवी द्वारा शुरू की गई 'सेव सॉयल'(Save Soil) पहल के समर्थन में हाल ही में उत्तर और दक्षिणी अमेरिका के लगभग 60 से अधिक शहरों से 16,000 से अधिक लोगों ने अटलांटा में एक वॉक में हिस्सा लिया। 'सेव सॉयल' के अभियान से जुड़ने वालों में हर उम्र और पृष्ठभूमि से जुड़े लोग थे जिन्होंने पैदल मार्च करते हुए मिट्टी के संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाई।

कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाने के लिए महापौर समेत राज्य के अधिकारी, स्थानीय चिकित्सक, व्यवसायी मौजूद थे।

पिछले दिनों आयोजित इस कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाने के लिए महापौर समेत राज्य के अधिकारी, स्थानीय चिकित्सक, व्यवसायी मौजूद थे। वहीं इस कार्यक्रम में मेहमान के तौर पर अटलांटा शहर के वेस्ट डायवर्सन के डायरेक्टर मिशेल वाइसमैन, आउटरीच के निदेशक व एमोरी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में बाल रोग के अध्यक्ष डॉ. लकी जैन और अटलांटा के चिल्ड्रन हेल्थकेयर के मुख्य शैक्षणिक अधिकारी और ग्रो व्हेयर यू आर के संस्थापक यूजीन कुक भी शामिल हुए थे।

वेस्ट डायवर्सन के डायरेक्टर मिशेल वाइसमैन ने इस मौके पर कहा कि हर चीज का आधार मिट्टी है। स्वस्थ मिट्टी के बिना हमें स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी, ताजा और स्वस्थ भोजन नहीं मिल सकता है। सभी तरह के भोजन का एक ही स्रोत है मिट्टी। पृथ्वी को ढकने वाली त्वचा इस पतली परत यानी मिट्टी ही असंख्य प्रजातियों का एक पारिस्थितिकी तंत्र होता है जो ग्रह पर सभी जीव की भूख मिटाता है।

'सेव सॉयल' वैश्विक नेता और दूरदर्शी सद्गुरु द्वारा शुरू की गई एक पहल है। 

हालांकि पिछले 150 वर्षों में सभी ग्रहों की मिट्टी का आधे से अधिक हिस्सा नष्ट हो गया है। वर्तमान में 50 फीसदी अमेरिकी मिट्टी और 75 फीसदी यूरोपीय मिट्टी में पर्याप्त जैविक सामग्री का अभाव है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2045 तक दुनिया की आबादी बढ़कर 9.3 अरब हो जाएगी। उस वक्त दुनिया अब जितना उत्पादन कर रही है उसकी तुलना में 40 फीसदी कम भोजन का उत्पादन करेगी।

बता दें कि 'सेव सॉयल' वैश्विक नेता और दूरदर्शी सद्गुरु द्वारा शुरू की गई एक पहल है। इस आंदोलन को दुनिया भर से समर्थन मिला है। सद्गुरु के पास अब 193 देशों के लिए नीतिगत बदलावों का समर्थन करने के लिए व्यापक दस्तावेज हैं। यह आंदोलन 3 अरब से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है और 74 से अधिक देशों ने नीतिगत बदलावों के लिए अपने समर्थन की पेशकश की है। इस आंदोलन को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन, यूनेस्को, विश्व खाद्य कार्यक्रम और खाद्य कृषि संगठन जैसे वैश्विक संस्थानों का भी समर्थन प्राप्त है।