दुर्लभ किताबें दान कीं, अमेरिकी भी जान सकेंगे भारत की संस्कृति और समृद्धि

‘इंडिया कलेक्शन लॉन्च’ में लगभग 120 लोगों ने भाग लिया। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 140 पुस्तकें प्रदान कीं। जबकि गुजराती साहित्य अकादमी, असम साहित्य सभा और जाकिर हुसैन सर्कल ने 110 पुस्तकें दान में दीं। संग्रह में GOPIO के उपाध्यक्ष राम गढ़वी द्वारा दान की गईं 60 गुजराती पुस्तकें शामिल हैं।

दुर्लभ किताबें दान कीं, अमेरिकी भी जान सकेंगे भारत की संस्कृति और समृद्धि

न्यूयॉर्क में भारतीय महावाणिज्य दूतावास और भारतीय मूल के लोगों के वैश्विक संगठन-एडिसन एनजे चैप्टर (GOPIO-Edison) ने एडिसन पब्लिक लाइब्रेरी को सैकड़ों दुर्लभ किताबें दान की हैं। ये किताबें भारत से संबंधित हैं। पुस्तकालय ने इसके लिए आभार जताया है। एडिसन और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय मूल के निवासियों की बड़ी संख्या है। इस पुस्तक दान का मकसद यह है कि अमेरिकी भी भारत की संस्कृति और समृद्धि से परिचित हो सकें।

इस मसले पर ‘इंडिया कलेक्शन लॉन्च’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

अभी हाल ही में वहां ‘इंडिया कलेक्शन लॉन्च’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें लगभग 120 लोगों ने भाग लिया। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 140 पुस्तकें प्रदान कीं। जबकि गुजराती साहित्य अकादमी, असम साहित्य सभा और जाकिर हुसैन सर्कल ने 110 पुस्तकें दान में दीं। इस संग्रह में GOPIO के उपाध्यक्ष राम गढ़वी द्वारा दान की गईं 60 गुजराती पुस्तकें शामिल हैं। राम गढ़वी गुजराती साहित्य अकादमी के अध्यक्ष हैं।

वाणिज्य दूत एके विजय कृष्णन सहित कई प्रमुख भारतीय अमेरिकी समुदाय के नेता, एडिसन और आसपास के शहरों से निर्वाचित परिषद सदस्य, मीडिया और बड़ी संख्या में समुदाय के नेता और भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने इस पहल को अपना समर्थन दिखाने के लिए इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान महावाणिज्य दूत रणधीर कुमार जायसवाल ने अमेरिका में जीवंत पुस्तकालय प्रणाली पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली ज्ञान के प्रसार और इसे एक विकसित देश बनाने में मदद करती है। इस प्रणाली के माध्यम से भारतीय पुस्तकों को उपलब्ध कराने से प्रवासी भारतीयों को दुर्लभ भारतीय पुस्तकों को पढ़ने का मौका मिलेगा।

संग्रह में GOPIO के उपाध्यक्ष राम गढ़वी द्वारा दान की गईं 60 गुजराती पुस्तकें शामिल हैं। 

पुस्तकालय के निदेशक एलन क्लेमन ने कहा कि दुर्लभ भारतीय पुस्तकों के इस नए संग्रह से वह बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय के कई कर्मचारी भारतीय मूल के हैं, जो 5 से 6 भारतीय भाषाएं बोलते हैं। इस पुस्तक दान ने भारत के संग्रह को चार गुना बढ़ा दिया है। क्लेमन ने कहा, हम भारतीय महावाणिज्य दूतावास और GOPIO के साथ अपने संबंधों को जारी रखने और एडिसन और कुछ अन्य क्षेत्रों में बसे भारतीय समुदाय को एक से अधिक बार पुस्तकालय में लाने के लिए तत्पर हैं।  

पद्मश्री पुरस्कार हासिल करने वाले पारिख वर्ल्डवाइड मीडिया और आईटीवी गोल्ड के अध्यक्ष डॉ. सुधीर पारिख ने कहा कि शिक्षा परोपकार का सबसे बड़ा तरीका है। एक छात्र की शिक्षा में मदद करने का अर्थ है एक परिवार, एक समुदाय और देश की मदद करना। यह एक महान पहल है, क्योंकि यह वह खिड़की है जहां अमेरिकी देखेंगे कि भारत की संस्कृति क्या है, भारत की समृद्धि क्या है। इस दौरान GOPIO-एडिसन चैप्टर की अध्यक्ष पल्लवी बेलवारीर ने एडिसन और आस-पास के क्षेत्रों में कई सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों के आयोजन की योजना के बारे में चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान यूक्रेन में रूस के युद्ध के पीड़ितों और इस महीने की शुरुआत में GOPIO के आजीवन सदस्य और समुदाय के नेता यश पॉल सोई के निधन पर मौन रखा गया।

गुजराती लिटरेरी एकेडमी ऑफ नॉर्थ अमेरिका, गांधीयन सोसाइटी, इंडो अमेरिकन कल्चरल सोसाइटी ऑफ यूएसए, असम साहित्य सभा और जाकिर हुसैन सर्कल सहित कई सहायक संगठन कार्यक्रम में सहभागिता करने के लिए उत्सुकता दिखाई। सबिनसा कॉरपोरेशन ने कार्यक्रम को स्पॉन्सर किया था। यह कंपनी ईस्ट विंडसर में स्थित एक खाद्य सप्लीमेंट कंपनी है। भारत में भी इसका कारोबार है।