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बलवानी और एलिजाबेथ के रिश्तों, निवेशकों से धोखे की कहानी है ‘द ड्रॉपआउट’

इस शृंखला ने बलवानी के मुकदमे को लेकर नए सिरे से रुचि पैदा की है। यह शृंखला 56 वर्षीय बलवानी और होम्स की जिंदगी पर रोशनी डालने में भी मदद कर रही है। इस साल जनवरी में अदालत ने होम्स को निवेशकों को धोखा देने के चार आरोपों में दोषी पाया गया था।

अमेरिकी अदालत में धोखाधड़ी के एक मामले में थेरानोस की सीईओ एलिजाबेथ होम्स के पूर्व प्रेमी रमेश बलवानी के खिलाफ सुनवाई चल रही है। इसके साथ ही इन दोनों के जीवन पर आधारित बहुप्रतीक्षित हूलू शृंखला ‘द ड्रॉपआउट’ भी रिलीज हो चुकी है। यह नाटक शृंखला एबीसी न्यूज/एबीसी रेडियो के पॉडकास्ट पर आधारित है जिसमें होम्स, बलवानी और उनकी कंपनी के उत्थान और पतन के बारे में बताया गया है। इस नाटक शृंखला में अमांडा सेफ्रिड ने होम्स की भूमिका निभाई है। जबकि भारतीय मूल के ब्रिटिश अभिनेता नवीन एंड्रयूज ने बलवानी की भूमिका निभाई है।

इस शृंखला ने बलवानी के मुकदमे को लेकर नए सिरे से रुचि पैदा की है। इस साल जनवरी में अदालत ने होम्स को निवेशकों को धोखा देने के चार आरोपों में दोषी पाया गया था। बलवानी और होम्स के बीच संबंध इस मुकदमे का केंद्र बिंदु है। होम्स थेरानोस कंपनी का चेहरा थी। वहीं बलवानी का निजी प्रभाव कंपनी के सभी क्षेत्रों में मौजूद था। बलवानी के मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के एक गवाह ने गवाही दी कि उसने केवल एलिजाबेथ होम्स के साथ व्यवहार किया। वह नहीं जानती कि बलवानी कौन है।

बलवानी के वकील स्टीफन कैसरेस के अनुसार हालांकि उनके मुवक्किल ने थेरानोस की स्थापना के समय होम्स के साथ एक रिश्ता शुरू किया था, लकिन वह 2009 तक कंपनी में शामिल नहीं हुए थे। बलवानी ने अदालत को बताया कि कंपनी के पास नकदी की कमी थी। मैंने कंपनी की मदद करने की पेशकश की और मैंने कंपनी को लोन दिया। यह एक सद्भावना ऋण था। बलवानी, होम्स से मिलने और थेरानोस में शामिल होने से पहले ही लाखों कमा चुके थे, जैसा कि "द ड्रॉपआउट" में दिखाया जा रहा है।

उन्होंने 1998 में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी कॉमर्सबिड को लॉन्च करने में मदद की। वर्ष 2009 में बलवानी थेरानोस के सीओओ बने। उन्होंने और होम्स ने साथ काम करने के दौरान अपने रिश्ते को छिपाया। 2016 में यह जोड़ी अलग हो गई और बलवानी ने थेरानोस छोड़ दिया। दरअसल बलवानी और एलिजाबेथ होम्स की मुलाकात तब हुई जब होम्स 18 साल की थीं और बलवानी 37 साल के थे। 2003 में कॉलेज छोड़ने के बाद होम्स अमेरिका के कैलिफोर्निया पहुंच गईं। यहीं पर उन्होंने थेरानोस कंपनी की बुनियाद रखी। कुछ ही समय में थेरानोस 9 बिलियन डॉलर की कंपनी बन गई। अक्टूबर 2015 में पत्रकार जॉन कैरिरू ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक स्टोरी पब्लिश की। और थेरानोस के कई राज खुलने लगे।

मार्च 2018 में यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने होम्स, थेरानोस और रमेश बलवानी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया। थेरानोस ने दावा किया था कि उनकी मशीन ‘एडिसन’ खून की एक बूंद से तमाम तरह के टेस्ट कर सकती है। लेकिन यह दावा फर्जी निकला। होम्स और बलवानी ने अपने झूठे दावों से डॉक्टरों और मरीजों के साथ छल किया। निवेशकों के सारे रुपये अचानक से डूब गए। उन्होंने भी कंपनी पर मुकदमा दर्ज करा दिया। तीन जनवरी 2022 को अदालत ने एलिजाबेथ होम्स को दोषी करार दिया है। अब बलवानी के खिलाफ मुकदमे को लेकर सुनवाई चल रही है।

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