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कोरोना का डर या कुछ और? 2020 के बाद हजारों प्रवासी भारत से गए नहीं हैं

देश से बाहर बसे भारतीय प्रवासी यानी ओसीआई और पीआईओ कार्ड धारकों ने लाखों की संख्या में कोरोना के वक्त भारत का दौरा किया था। उनमें कई हजार ऐसे भी हैं जो अभी तक वापस नहीं लौटे हैं।

देश से बाहर बसे भारतीय प्रवासी यानी ओसीआई और पीआईओ कार्ड धारकों ने लाखों की संख्या में कोरोना के वक्त भारत का दौरा किया था। उनमें कई हजार ऐसे भी हैं जो अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। भारत के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में कोरोना महामारी के प्रकोप के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद 32,79,315 ​हजार विदेशियों ने भारत का दौरा किया था जिनमें से 40,239 भारत में ही रुक गए।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत आने वाले विदेशियों की अधिकतम संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका से थी। इसके बाद बांग्लादेश, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, पुर्तगाल और अफगानिस्तान से विदेशी भारत आए थे।

भारत में कोरोना वायरस से प्रेरित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा पहली बार 2020 में 25 मार्च से 21 अप्रैल तक की गई थी और इसे 31 मई 2020 तक तीन बार बढ़ाया गया था। वहीं सरकार ने निर्धारित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 25 मार्च 2020 से 27 मार्च 2022 तक दो साल के लिए निलंबित किए रखा। इस अवधि के दौरान मात्र एयर बबल व्यवस्था के तहत उड़ानें संचालित की गईं जिनमें उन लोगों को अनुमति दी गई जो भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) कार्डधारक और किसी भी देश के पासपोर्ट रखने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ) कार्डधारक हैं। हालांकि टूरिस्ट वीजा को छोड़कर किसी भी उद्देश्य के लिए भारत आने के इच्छुक सभी विदेशी नागरिकों को भी अनुमति दी गई थी।

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