खंडहरों में खूबसूरती समेटता हम्पी, विध्वंस में भी सुनाता है 'गौरव गाथा'

भारत के प्रतापी राजाओं में से एक कृष्णदेव राय के जिंदा रहने तक यह शहर हमला झेलने के बाद फिर खड़ा हो जाता था लेकिन उनकी मृत्यु के बाद हुए मुस्लिम शासकों के हमलों से यह ऐसा टूटा कि फिर उठने की हिम्मत नहीं कर पाया।

खंडहरों में खूबसूरती समेटता हम्पी, विध्वंस में भी सुनाता है 'गौरव गाथा'
पत्थर पर तराश कर बनाया गया रथ (हम्पी)

14वीं शताब्दी में भारत के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यों में से एक विजयनगर की राजधानी हम्पी कभी दुनियाभर में अपनी बेजोड़ स्थापत्य कला के लिए जानी जाती थी। ऐसा कहा जाता है कि मंदिरों का यह शहर इटली के रोम से भी अधिक समृद्ध था लेकिन आज यहां मंदिरों और महलों के अवशेष नजर आते हैं। यूनिस्को के विश्व धरोहर की सूची में शामिल हम्पी के ये खंडहर भी बोल उठते हैं और जब आप इन खंडहरों को देखेंगे तो यह अहसास आपकी आंखें नम कर देगा कि भारत ने क्या खोया है। ये खंडहर भी अपने में खूबसूरती ओढ़े हुए हैं जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये अपने वास्तविक रूप में क्या सौंदर्य बिखेरते होंगे।

विजय विट्ठल मंदिर

हम्पी का गौरवान्वित इतिहास, क्रूरता ने छीना गुरूर

ऐतिहासिक स्थल की बात हो तो उसको इतिहास में जाना बहुत जरूरी है। इस शहर की स्थापना सम्राट हरिहर ने 1336 ईस्वी में की थी। माना जाता था कि उस दौर में यह भारत के सबसे संपन्न शहरों में से एक था लेकिन 16वीं शताब्दी आते-आते इस शहर को जैसे नजर सी लग गई, जब दक्कन के मुस्लिम शासकों ने हमला बोलना शुरू कर दिया। भारत के प्रतापी राजाओं में से एक कृष्णदेव राय के जिंदा रहने तक यह शहर हमला झेलने के बाद फिर खड़ा हो जाता था लेकिन उनकी मृत्यु के बाद हुए मुस्लिम शासकों के हमलों से यह ऐसा टूटा कि फिर उठने की हिम्मत नहीं कर पाया। यह शहर अपनी पहचान के तौर पर छोड़ गया तो केवल खंडहर जिनका दर्द आज भी उनकी दरारों में महसूस किया जा सकता है।

कला संस्कृति का केंद्र हुआ करता था हम्पी

एक टूटा हुआ शहर लेकिन आंखों का तारा

15 वीं शताब्दी में पर्सिया के राजदूत अब्दुल रज्जाक ने कभी हम्पी की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए कहा था, 'यह शहर इतना भव्य था कि ऐसा शहर किसी ने न तो देखा था और न उसके बारे में सुना था। लोगों को पता ही नहीं था कि दुनिया में ऐसा शहर भी अस्तित्व में है।' हम्पी करीब 29 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है और आप इसे दुनिया के सबसे बड़ा खुला संग्रहालय (ओपन-एयर-म्यूजियम) मान सकते हैं। भव्य मंदिरों के अलावा हम्पी में शाही हाथियों के लिए अस्तबल, विशाल बाजार, स्नानागार और पत्थर पर तराशकर बनाए गए स्तंभ भी थे।

हाथियों का अस्तबल ऐसा तो महल होगा कैसा, सोचिए!

7वीं सदी से अपने स्थान पर बरकरार विरुपक्ष मंदिर

आज जब यह शहर खंडर में तब्दील हो चुका है फिर भी दुनियाभर के सैलानियों को अपनी तरफ खींचता है। शहर के दो महत्वपूर्ण केंद्र हैं। पहला शाही केंद्र है जिसमें महल, स्नानागर, मंडप, शाही अस्तबल और मंदिर हैं, जबकि दूसरा पवित्र केंद्र जहां विरुपक्ष मंदिर स्थित है और इसी इलाके में हम्पी का विशाल बाजार भी हुआ करता था।

विरूपक्ष मंदिर का निर्माण तुंगभद्रा नदी के किनारे 7वीं सदी में हुआ था। माना जाता है कि तब से लेकर अब तक इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा निर्बाध रूप से हो रही है। दक्षिण भारत में यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है जहां वार्षिक त्योहारों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

विरुपक्ष मंदिर

यहां से संजो कर ले गई यादें नहीं छोड़ेंगी पीछा

अगर आप इस गर्मी की छुट्टी में हम्पी घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो फिर अपने फ्लाइट के टिकट का इंतजाम जल्द कर लीजिए। हम्पी से बेंगलुरु का इंटरनैशनल एयरपोर्ट 290 किलोमीटर है वहां से आप हम्पी के नजदीकी एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं जो कि विद्यानगर में स्थित है । यहां से हम्पी की दूरी 35 किलोमीटर है। हालांकि, आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि यहां के लिए सीमित संख्या में ही विमान उड़ान भरते हैं। आप चाहें तो बेंगलुरू से हम्पी के लिए कार किराए पर ले सकते हैं। वहीं, अगर इस शहर की खूबसूरती के सही मायने में दर्शन करने हैं तो आप दोपहिया लेकर निकल पड़िए। यह आपको सही रेट पर प्राइवेट ऑपरेटर्स मुहैया करा देंगे। यहां से लौटकर जब आप अपने-अपने गंतव्य को पहुंचेंगे तो यहां से संजो कर ले गई यादें कई दिनों तक आपका पीछा नहीं छोड़ेंगी और निश्चित रूप से इस गौरवशाली शहर के इतिहास को आप अपने दोस्तों, परिवार और आने वाली पीढ़ियों के साथ साझा करेंगे।

फोटो साभार : सभी तस्वीरें कर्नाटक के पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से ली गई हैं