400 से अधिक जरूरतमंदों के घर रोजाना मुफ्त टिफिन पहुंचाती है 'गुरु की रसोई'

इस संस्था को होशियारपुर के चेला गांव के मूल निवासी और कनाडा में रहने वाले एनआरआई गुरजिंदर सिंह ने शुरू किया है। टिफिन में रोटी और चावल, सब्जियां भी होती हैं। इसके साथ ही किसी दिन दाल दी जाती है, तो किसी दिन राजमा छोले वगैरह होते हैं। टिफिन में मिठाइयां भी होती हैं।

400 से अधिक जरूरतमंदों के घर रोजाना मुफ्त टिफिन पहुंचाती है 'गुरु की रसोई'

गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों को रोजाना भोजन कराने के मकसद से एक धर्मार्थ संगठन निष्काम सेवा सोसायटी भारत स्थित पंजाब के नवांशहर और होशियारपुर में 400 से अधिक मुफ्त खाने के टिफिन वितरित कर रही है। संस्था के स्वयंसेवक जरूरतमंदों के घर पर टिफिन पहुंचाते हैं। इस संस्था को होशियारपुर के चेला गांव के मूल निवासी और कनाडा में रहने वाले एनआरआई गुरजिंदर सिंह द्वारा शुरू किया गया है। मुफ्त टिफिन सेवा का लाभ उठाने वाले 90 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से हैं। 10 फीसदी ऐसे बुजुर्ग माता-पिता हैं जो अकेले रहते हैं और खाना बनाने की स्थिति में नहीं हैं।

पिछले साल अप्रैल में यह सेवा शुरू हुई। उस समय चंद स्वयंसेवकों के साथ केवल 22 टिफिन वितरित किए जा रहे थे।

निष्काम सेवा सोसायटी ने नवांशहर की गुरु नानक मिशन सेवा सोसायटी की मदद से नवांशहर की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और होशियारपुर के खरड़ अछरावल गांव में 'गुरु की रसोई' नाम से एक स्थायी रसोईघर स्थापित किया है, जहां से गरमा-गरम टिफिन पैक करके जिले के जरूरतमंदों को भेजा जाता है। टिफिन में रोटी और चावल तो रहता ही है, साथ ही अलग अलग तरह की सब्जियां भी होती हैं। इसके साथ ही किसी दिन दाल दी जाती है, तो किसी दिन राजमा छोले वगैरह होते हैं। टिफिन में मिठाइयां भी होती हैं।

इस मिशन के बारे में गुरु नानक मिशन सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष सुरजीत सिंह का कहना है कि 'गुरु की रसोई' गुरजिंदर सिंह के दिमाग की उपज है, जो समाज के लिए विशेष रूप से कुछ करना चाहते थे। उस समाज को लौटाना चाहते थे, जिसने उन्हें सबकुछ दिया है। उन्होंने पहले इस विचार पर अपने मित्र कुलवंत सिंह के साथ चर्चा की, जिन्होंने फिर इसे हमारे साथ साझा किया। फिर हमने उनके विचार को हकीकत में लाने का फैसला किया। इसके बाद एक भूखंड की तलाश शुरू कर दी, जहां हम इस रसोई को स्थापित कर सकें।

पिछले साल अप्रैल में यह पहल शुरू की गई। उस समय चंद स्वयंसेवकों के साथ केवल 22 टिफिन वितरित किए जा रहे थे। लेकिन अब टीम बड़ी हो गई है। इसके अलावा, आसपास के इलाकों के लोग भी भोजन तैयार करने और पैकेजिंग में मदद करने के लिए आते हैं। यह पूछे जाने पर कि जरूरतमंद लोग किस तरह से इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं, गुरु की रसोई के अध्यक्ष अमरीक सिंह ने कहा कि स्वयंसेवकों और अन्य सदस्यों के संपर्क नंबर हर जगह प्रसारित किए गए हैं। इसके अलावा, लोग उनसे वॉट्सऐप ग्रुप, फेसबुक पेज और यहां तक कि यूट्यूब चैनल के जरिए भी संपर्क करते हैं।