जर्मनी में बच्चों को संस्कृत सिखा रही हैं भारतीय मूल की प्राजक्ता अग्निहोत्री

इस भारतीय महिला के पास जर्मनी के सभी हिस्सों के बच्चे संस्कृत सीखने के लिए जुड़े हुए हैं। वह शुरुआत से ही बच्चों को वर्चुअल संस्कृ​त सिखा रही हैं। इसके लिए वह मात्र 20 यूरो प्रति माह लेती हैं। वह अपने विषयों में डेली इवेंट को भी शामिल करती हैं।

जर्मनी में बच्चों को संस्कृत सिखा रही हैं भारतीय मूल की प्राजक्ता अग्निहोत्री

जर्मनी से संस्कृत का जुड़ाव दशकों से है। वर्ष 1800 में विलियम जोंस ने भारत के प्रसिद्ध कवि कालीदास द्वारा लिखित अभिज्ञान शाकुंतलम का जर्मन भाषा में अ​नुवाद किया था। तभी से जर्मन लोगों के बीच संस्कृत भाषा के प्रति रुचि है। एक वजह यह भी है कि लातिन भाषा और संस्कृत भाषा में कई समानताएं पाई गई हैं। खैर ये तो शोध का एक अलग विषय है। आज हम आपको ऐसी महिला से मिलवाते हैं जो इन दिनों जर्मनी में देश के जर्मन बच्चों को संस्कृत सीखा रही हैं।

जर्मनी में डॉर्टमुंड शहर में रहने वाली 32 वर्षीय प्राजक्ता अग्निहोत्री इन दिनों जिन बच्चों को संस्कृत सिखा रही हैं, उनमें जर्मनी के अलावा अन्य देशों (फिनलैंड, नीदरलैंड जैसे) के बच्चे भी शामिल हैं, जो प्राजक्ता से ​वर्चुअल के माध्यम से संस्कृत में काफी कुछ सीखते हैं। पेड़, पक्षियों के संस्कृत नाम के अलावा वे बच्चे आम जीवन के संस्कार भी संस्कृत में सीखते हैं।