भारत-यूके के अतीत और वर्तमान पर प्रिंट प्रदर्शनी लगाएंगे ये संस्थान

इस क्रॉस-कल्चरल लर्निंग प्लेटफॉर्म में भाग लेने के लिए फेलोशिप 18 से 25 साल की उम्र के 20 युवा प्रतिभाओं को मौका देगी। इस ​परियोजना में प्रवासी पृष्ठभूमि के 30 कलाकारों को पूरे यूरोप में 5 प्रिंट स्टूडियो में निवास की पेशकश की जाएगी।

भारत-यूके के अतीत और वर्तमान पर प्रिंट प्रदर्शनी लगाएंगे ये संस्थान
एडिनबर्ग प्रिंटमेकर्स (EP) की सीईओ जेनेट आर्चर और फ्यूचर फ्लो इंडिया की निदेशक अरुंधति मित्तर। (फोटो: EP)

भारत और यूके ने मिलकर फ्यूचर फ्लो नाम की एक फेलोशिप की घोषणा की है जो दोनों देशों के युवाओं के लिए एक है। इस फेलोशिप के माध्यम से दोनों देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य के संबंधों को एक प्रिंट प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया जाएगा।

फ्यूचर फ्लो एक प्रिंट प्रदर्शनी की दिशा में काम करेगा, जिसका लक्ष्य साल 2023 के वसंत में भारत के अहमदाबाद और नई दिल्ली से शुरुआत करना है। यह परियोजना ब्रिटिश काउंसिल द्वारा समर्थित है। इसका नेतृत्व भारत में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान और स्कॉटलैंड में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के साथ साथ एडिनबर्ग प्रिंटमेकर्स और फ्लो इंडिया करेंगे जो इस परियोजना के लिए डिजाइन और वितरण सलाहकार हैं।

अगस्त 2022 से अगस्त 2023 तक इस प्रदर्शनी में मूर्तिकला और डिजिटल के अलग-अलग रूपों के साथ-साथ पारंपरिक कागज और वस्त्र प्रिंट का भी इस्तेमाल किया जाएगा। फ्लो इंडिया की निदेशक अरुंधति मित्तर के अनुसार यह प्रदर्शनी भारत, स्कॉटलैंड और लगभग पूरे​ ब्रिटेन में दोनो देशों के इतिहास को प्रदर्शित करेगी।

एडिनबर्ग प्रिंटमेकर्स की एक पेंटिंग भारत के विकास को दर्शाती है। (फोटो: EP)

मित्तर ने कहा कि यह प्रिंटमेकिंग के क्षेत्र में भारत और स्कॉटलैंड के ट्रैक रिकॉर्ड को आकर्षित करेगा। हमें उम्मीद है कि यहां दर्शकों को काफी कुछ नया देखने को मिलेगा। परियोजना प्रिंट-मेकिंग पर ध्यान केंद्रित करेगी लेकिन व्याख्या भाषा, वीडियो, फोटोग्राफी और अभिव्यक्ति के अन्य दृश्य माध्यमों का उपयोग कर सकती है।

ईपी की एक और पेंटिंग भारत के औद्योगीकरण युग को दर्शाती है। (फोटो: EP)

इस क्रॉस-कल्चरल लर्निंग प्लेटफॉर्म में भाग लेने के लिए फेलोशिप 18 से 25 साल की उम्र के 20 युवा प्रतिभाओं को मौका देगी। इसके अलावा फ्यूचर फ्लो एक अन्य अंतरराष्ट्रीय परियोजना 'इन फ्रॉम द मार्जिन्स' के साथ काम कर रहा है, जिसे यूरोप के एक क्रिएटिव ग्रूप द्वारा वित्त पोषित किया गया है। इस ​परियोजना में प्रवासी पृष्ठभूमि के 30 कलाकारों को पूरे यूरोप में 5 प्रिंट स्टूडियो में निवास की पेशकश की जाएगी।

बता दें कि इससे पहले साल 2016 में फ्लो इंडिया ने अकादमिक वर्ष 2016-2017 के माध्यम से स्कूली बच्चों के लिए टेल्स एंड टेल्स शीर्षक से मुफ्त प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित करने के लिए भारत के कला और फोटोग्राफी संग्रहालय (एमएपी) के साथ सहयोग किया था।