अलर्ट: न्यू जर्सी में भारतीयों व एशियाई-अमेरिकियों पर सेंधमारी का खतरा अधिक, क्यों और किसने कहा?

इस समुदाय को निशाना बनाने के पीछे के कारण को लेकर एफबीआई के स्पेशल एजेंट माइक राट्टा का कहना है कि यह माना जाता रहा है कि एशियाई समुदाय नकदी अपने घरों में रखता है और बैंकों का उपयोग नहीं करते हैं। इसी के चलते अपराधी विशेष तौर पर उन्हें निशाना बनाते हैं।

अलर्ट:  न्यू जर्सी में भारतीयों व एशियाई-अमेरिकियों पर सेंधमारी का खतरा अधिक, क्यों और किसने कहा?
Photo by Maxim Hopman / Unsplash

फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने न्यू जर्सी में एशियाई-अमेरिकी समुदाय को चेतावनी दी है कि उनके सेंधमारी का शिकार होने का खतरा अधिक है। एक स्थानीय रेडियो स्टेशन की रिपोर्ट के अनुसार यह चेतावनी नेवार्क में स्थित एफबीआई फील्ड ऑफिस के सुपरवायजरी स्पेशल एजेंट माइक राट्टा की ओर से आई है। माइक के अनुसार पिछले तीन साल में गार्डन स्टेट में आपराधिक गुटों की ओर से एशियाई अमेरिकी कारोबारियों को निशाना बनाने के मामले बढ़े हैं।

माइक राट्टा का कहना है कि ये अपराधी बहुत ध्यान से इन कारोबारों पर नजर रख रहे हैं। यह पता लगाने के लिए कि वह कहां रहते हैं अपराधी उनकी कार का पीछा कर सकते हैं इसके बाद वह उनके आवास पर नजर रखते हैं। ये अपराधी इन लोगों का घर, ऑफिस और अन्य जगहों तक भी पीछा करते हैं। माइक ने कहा कि यह बदमाशों का कोई आम गुट नहीं है। ये अपराधी पेशेवर हैं और अपने निशाने पर वह उसी तरह नजर रखते हैं जिस तरह कानून प्रवर्तन एजेंसियां करती हैं।

एफबीआई का मानना है कि इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वाले कई आपराधिक समूह हैं। बता दें कि एशियाई-अमेरिकी समुदाय न्यू जर्सी में सबसे तेजी से बढ़ने वाला जातीय समूह है। साल 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां की आबादी में इस समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 10 फीसदी है। उस समय 90 लाख नागरिकों में एशियाई-अमेरिकी लगभग नौ लाख 41 हजार थे। इनमें सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की (3.84 लाख) है। इसके बाद चीन (1.68 लाख) का नंबर आता है।

राज्य में सबसे अधिक एशियाई-अमेरिका जनसंख्या वाली काउंटी मिडिलसेक्स, बर्जन और हडसन हैं। मिडिलसेक्स की 24 फीसदी आबादी, बर्जन की 16 फीसदी और हडसन की 15 फीसदी आबादी एशियाई-अमेरिकी है। इस समुदाय को निशाना बनाने के पीछे के कारण को लेकर माइक राट्टा का कहना है कि यह माना जाता रहा है कि एशियाई समुदाय नकदी अपने घरों में रखता है और बैंकों का उपयोग नहीं करते हैं। इसी के चलते अपराधी विशेष तौर पर उन्हें निशाना बनाते हैं।

राट्टा ने एशियाई-अमेरिकी समुदाय को सुझाव दिया है कि वह अपने आस-पास हो रही गतिविधियों से वाकिफ रहें और यह तय करें कि कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय के लोगों को नकदी और आभूषण बैंक में रखने का सुझाव भी दिया है। माइक ने आगे कहा कि एफबीआई इस अपटेक को इसलिए सार्वजनिक कर रही है ताकि समुदाय को स्थिति की जानकारी हो सके और वह इस तरह के अपराधियों के जाल का शिकार होने से बच सकें।