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अमेरिका में भारतीय युवाओं की पीड़ा, बचपन यहीं बीता, अब हम देश क्यों छोड़ें?

अथुल्या ने अमेरिकी सीनेट न्यायिक उपसमिति के सदस्यों से अपना दुख साझा किया है। उन्होंने सिनेटर के सामने गुहार लगाई कि उनकी दिक्कतों को 8 महीने के अंदर दूर करें। ऐसी ही कहानी नर्सिंग ग्रेजुएट एरिन की है। उन्हें भी पिछले साल वापस जाने को तब कहा गया जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी।

अमेरिका में 23 साल की अथुल्या राजकुमार यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से ग्रेजुएट हैं। वह जब 4 साल की थीं तब से वह अमेरिका में रह रही हैं। उनकी मां यहां अकेली हैं। लेकिन उन्हें 8 महीने के अंदर जबरदस्ती अमेरिका छोड़ने को कहा जा रहा। यह सिर्फ अथुल्या की कहानी नहीं है। अमेरिका में भारतीय मूल के ऐसे कई युवा हैं जिन्होंने अपना बचपन अमेरिका में गुजारा, लेकिन अब अचानक उन्हें जबरदस्ती निकाला जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 5000 युवाओं को ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

Photo : Twitter @Improve the dream

ये लोग ऐसे प्रवासी हैं, जो बचपन में ही अपने माता-पिता के साथ अमेरिका गए थे। वे पूरी तरह से अमेरिकन इंडियन बन गए हैं। लेकिन इनके पास अमेरिका में रहने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। ये ऐसे बच्चे हैं जो अपने माता-पिता के आश्रितों के रूप में अमेरिका आते हैं। इनके अभिभावकों के पास अमेरिका में काम करने का कानूनी परमिट है। लेकिन कानून के मुताबिक जब इनके बच्चे 21 साल के हो जाते हैं, तो वे अभिभावक पर अपनी निर्भरता की स्थिति खो देते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें अमेरिका में रहने का अधिकार नहीं दिया जाता है।

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