DNA आधारित वैक्सीन बनाने वाला पहला देश बना भारत, पीएम मोदी ने सराहा

भारत में यह ऐसी छठी वैक्सीन है, जिसे इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है।

DNA आधारित वैक्सीन बनाने वाला  पहला देश बना भारत, पीएम मोदी ने सराहा

कोरोना महामारी से लड़ने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। भारत के वैज्ञानिकों ने संकट के इस दौर में एक के बाद एक दो स्वदेशी वैक्सीन तैयार किए। भारत संभवत: पहला देश बन गया है, जिसने डीएनए आधारित वैक्सीन तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D दुनिया की पहली डीएनए-आधारित वैक्सीन को मंजूरी भारत के वैज्ञानिकों के अभिनव उत्साह का प्रमाण है।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत पूरी ताकत के साथ कोविड-19 से लड़ रहा है। जायडस यूनिवर्स के दुनिया के पहले डीएनए आधारित वैक्सीन ZyCoV-D को मंजूरी भारत के वैज्ञानिकों के इनोवेटिव उत्साह का प्रमाण है। वास्तव में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”

जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने शुक्रवार को आपात इस्तेमाल की इजाजत दे दी। इसके बाद कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में भारत को एक और हथियार मिल गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिक मंत्रालय के अनुसार, यह 12 साल या उससे ऊपर के लोगों को लगाई जाएगी। भारत में यह ऐसी छठी वैक्सीन है, जिसे इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है। इससे पहले सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, रूस की स्पुतनिक-वी, और अमेरिका की मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन को इजाजत दी गई है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने कहा कि जायडस कैडिला टीके को 12 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों को दिया जा सकता है। विभाग ने बताया कि डीएनए आधारित कोरोना वायरसरोधी दुनिया का पहला टीका है। इसके अनुसार टीके की तीन खुराक दिए जाने पर यह सार्स-सीओवी-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन का उत्पादन करता है, जो बीमारी और वायरस से सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।