इस्तीफे के बाद उठे सवाल, क्या गूगल दलित विरोधी है? संस्था ने किया इनकार

गूगल में कथित जातिगत भेदभाव के खिलाफ स्टैंड लेने वालीं तनुजा गुप्ता को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। इस बारे में गूगल की पूर्व परियोजना प्रबंधक तनुजा गुप्ता का कहना है कि गूगल में जातिगत भेदभाव एक वास्तविकता है। तनुजा के अनुसार वास्तविकता यह है कि ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, यह एक पैटर्न है।

इस्तीफे के बाद उठे सवाल, क्या गूगल दलित विरोधी है? संस्था ने किया इनकार
Photo by Christian Wiediger / Unsplash

अमेरिका स्थित एक दलित नागरिक अधिकार संगठन इक्वेलिटी लैब्स ने गुरुवार को गूगल के दफ्तर में जातिवादी माहौल होने का आरोप लगाया। उल्लेखनीय है कि भारतीय-अमेरिकी कर्मचारी ने इस मामले में पद से त्यागपत्र दे दिया है। इसके बाद गूगल को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे। हालांकि गूगल ने इन तमाम आरोपों से इनकार किया है।  प्रवक्ता शैनन न्यूबेरी का कहना है कि हमारे कार्यस्थल पर जातिगत भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। अपने कार्यालय में भेदभाव और प्रतिशोध के खिलाफ हमारे यहां स्पष्ट नीति है। यह बात सभी लोग जानते हैं।

इक्वेलिटी लैब्स के कार्यकारी निदेशक थेनमोझी सुंदरराजन का कहना है कि भेदभावपूर्ण रुख के कारण अप्रैल में गूगल ने विविधता, इक्विटी और समावेश वार्ता को रद्द कर दिया। 

वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इक्वेलिटी लैब्स के कार्यकारी निदेशक थेनमोझी सुंदरराजन का कहना है कि भेदभावपूर्ण रुख के कारण अप्रैल में गूगल ने विविधता, इक्विटी और समावेश वार्ता को रद्द कर दिया। जातिगत समानता के विरोधियों ने आंतरिक रूप से सुंदरराजन और इक्वेलिटी लैब्स के बारे में गलत सूचना प्रसारित की, जिससे कार्यक्रम को अंतिम रूप से रद्द किया  जा सके। सुंदरराजन ने कहा कि जाति समानता का आंदोलन प्यार, सहानुभूति और न्याय में निहित है। मुझे यह व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे हैं कि गूगल ने अपने कर्मचारियों और मेरे प्रति कितने दर्दनाक और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने गैरकानूनी रूप से जाति समानता के बारे में विचार करना रद्द कर दिया।

गूगल में कथित जातिगत भेदभाव के खिलाफ स्टैंड लेने वालीं तनुजा गुप्ता को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। इस बारे में गूगल की पूर्व परियोजना प्रबंधक तनुजा गुप्ता का कहना है कि गूगल में जातिगत भेदभाव एक वास्तविकता है। 11 साल तक कंपनी में रहने के बाद मेरे पास पद छोड़ने के कई कारण थे। अपना काम करने और कंपनी में जातिगत समानता को बढ़ावा देने की प्रक्रिया में मैंने रंगभेद को लेकर चार महिलाओं को परेशान और खामोश देखा। तनुजा गुप्ता ने गत 1 जूनको अपने इस्तीफे में 15,000 से अधिक गूगल कर्मचारियों को ईमेल साझा किया। तनुजा का कहना है कि वास्तविकता यह है कि ये अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, यह एक पैटर्न है।

तनुजा के गूगल से जाने के बाद इक्वेलिटी लैब्स ने मांग की है कि गूगल समाचार को अपने सभी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। गूगल को जाति को एक संरक्षित श्रेणी के रूप में तुरंत जोड़ना चाहिए। एशियन पैसिफिक अमेरिकन लेबर एलायंस की कार्यकारी निदेशक अल्विना का कहना है कि हम इस बात से बहुत चिंतित हैं कि गूगल ने सुरक्षित कार्यस्थल और जातिगत समानता की बात करने वालों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की। हम जानते हैं कि यह पूरे श्रमिक आंदोलन पर हमला है। अल्फाबेट वर्कर्स यूनियन के यूसुफ केलैटा का कहना है कि जाति-उत्पीड़ित लोगों के नागरिक अधिकारों की लड़ाई श्रमिकों की लड़ाई है। जाति उत्पीड़ित श्रमिकों को एक सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार है।