अमेरिका की क्रिकेट टीम में दम भर रहे हैं भारतीय मूल के मोनांक पटेल

पटेल भारत में पैदा हुए थे। वह यूएसए टीम के राष्ट्रीय कप्तान हैं और बिना कोच आदि के घर में रहते हुए भी अभ्यास करते हैं। विकेटकीपर और बल्लेबाज पटेल ने 2018 में डेब्यू किया था जिसके बाद उन्होंने 19 ओडीआई और और 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।

अमेरिका की क्रिकेट टीम में दम भर रहे हैं भारतीय मूल के मोनांक पटेल
Photo by Yogendra Singh / Unsplash

अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के अलावा क्रिकेट में रुचि लेने वालों की संख्या काफी कम है। लेकिन यूएसए क्रिकेट कप्तान भारतीय मूल के मोनांक पटेल का मानना है कि साल 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबानी करने से अमेरिका में इस खेल का प्रोफाइल बढ़ेगा। भारत के राज्य गुजरात के पूर्व अंडर-19 खिलाड़ी पटेल जीवन यापन के लिए भी क्रिकेट खेलते हैं। वह यूएसए टीम के राष्ट्रीय कप्तान हैं और बिना कोच आदि के घर में रहते हुए भी अभ्यास करते हैं।

पटेल भारत में पैदा हुए थे। उन्हें 2010 में ग्रीन कार्ड मिला और वह स्थायी रूप से न्यू जर्सी में आकर बस गए। Photo : www.livecricketmatchtoday.com

मुंबई में जन्में पटेल बताते हैं कि क्रिकेट उनका फुलटाइम करियर है। वह रोजाना की जरूरतों के लिए हफ्ते में तीन बार बच्चों को कोचिंग देते हैं। दरअसल अमेरिका में गुजराती समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। पटेल भारत में पैदा हुए थे। उन्हें 2010 में ग्रीन कार्ड मिला और वह स्थायी रूप से न्यू जर्सी में आकर बस गए।

विकेटकीपर और बल्लेबाज पटेल ने 2018 में डेब्यू किया था जिसके बाद उन्होंने 19 ओडीआई और और 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। पटेल ने एक मीडिया एजेंसी को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका की टीम में उच्च स्तर की टीमों से प्रतिस्पर्धा करने की बहुत संभावनाएं हैं। यूएसए की टीम पिछले तीन सालों से अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हमारी टीम स्कॉटलैंड और यूएई जैसी टीमों के साथ खेली है। मुझे लगता है कि हम बड़ी टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

पटेल ने बताया कि भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रहे उन्मुक्त चंद और मन्नान शर्मा जैसे जाने-माने खिलाड़ी अब यूएसए आ गए हैं। हालांकि यह क्रिकेट बोर्ड तय करेगा कि उन्हें क्रिकेट के स्तर को सुधारने के लिए ऐसे खिलाड़ियों को जिम्मेदारी देनी चाहिए या नहीं। उन्होंने बताया​ कि अमेरिका में एक निजी कोच को सैलरी पर रखना आसान नहीं है और इसलिए वह अपनी अकादमी में अकेले प्रशिक्षण लेते हैं।