प्रशंसकों ने दी दिग्गज भारतीय क्लासिकल डांसर झांग जून को श्रद्धांजलि

झांग जून का जन्म 1933 में हुआ था। उन्होंने भरतनाट्यम, कथक व ओडिसी नृत्य सीखा और उन्हें चीन में लोकप्रिय बनाया। साल 1996 में उन्हें कैंसर होने का पता चला था और साल 2012 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने भारत के प्रख्यात नृत्य कलाकार बिरजू महाराज और उदय शंकर से नृत्य कला की शिक्षा प्राप्त की थी।

प्रशंसकों ने दी दिग्गज भारतीय क्लासिकल डांसर झांग जून को श्रद्धांजलि

भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाओं से जुड़ी चीन की दिवंगत कलाकार झांग जून को श्रद्धांजलि देने के लिए बीजिंग में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) के सभागार में हुए इस कार्यक्रम में 300 से भी अधिक लोग अपने बच्चों के साथ शामिल हुए थे।

भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत, चीन के पूर्व उप वित्त मंत्री और एआईआईबी के अध्यक्ष जिन लिकुन ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की थी। Photo: Twitter @EOIBeijing

इस दौरान प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और लोगों का मन मोह लिया। इन कलाकारों ने अपना जीवन भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न शैलियों को लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित कर दिया है। झांग के छात्र और भरतनाट्यम में कुशल जिन शानशान ने इसे एक सपने के सच होने जैसा करार दिया।

भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत, चीन के पूर्व उप वित्त मंत्री और एआईआईबी के अध्यक्ष जिन लिकुन ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की थी। उन्होंने शास्त्रीय तमिल और हिंदी संगीत के नृत्य कलाकारों का खूब उत्साह से स्वागत किया और उन्हें इन नृत्य कलाओं को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

चीन के तत्कालीन प्रीमियर झू एनलाई की ओर से झांग को खासा प्रोत्साहन मिला था। उन्होंने पहली बार भारत की यात्रा 1950 के दशक की शुरुआत में की थी। Photo: Twitter @EOIBeijing

झांग जून का जन्म साल 1933 में हुआ था। उन्होंने भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी नृत्य कला सीखी और उन्हें चीन में लोकप्रिय बनाने का काम किया था। साल 1996 में उन्हें कैंसर होने का पता चला था और साल 2012 में उनका निधन हो गया था। रावत ने कहा कि झांग चीन में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सबसे महान शिक्षकों में एक थीं।

चीन के तत्कालीन प्रीमियर झू एनलाई की ओर से झांग को खासा प्रोत्साहन मिला था। उन्होंने पहली बार भारत की यात्रा 1950 के दशक की शुरुआत में की थी। इसी दौरान भारतीय नृत्य व कला के स्वरूपों ने उन्हें आकर्षित किया था। माओत्से तुंग की विनाशकारी सांस्कृतिक क्रांति (1966-76) को छोड़ते हुए सात बार और भारत की यात्रा की थी।

उन्होंने भारत के प्रख्यात नृत्य कलाकार बिरजू महाराज और उदय शंकर से नृत्य कला की शिक्षा प्राप्त की थी। बाद में उन्होंने मद्रास (अब चेन्नई) में स्थित भरतनाट्यम के एक प्रख्यात संस्थान में भी प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्होंने चीन के प्रसिद्ध नृत्य समूहों 'द ओरिएंटल सॉन्ग' और 'डांस एनसेंबल' का निर्माण करने में सहायता भी की थी।