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चीन का बुलावा नहीं आया तो खतरे में पड़ सकता है भारत के 23 हजार छात्रों का भविष्य

अगर पाकिस्तान की बात करें तो चीन का रवैया उलट नजर आता है। चीन ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की यात्रा के दौरान उनसे लगभग 28,000 पाकिस्तानी छात्रों की वापसी की व्यवस्था करने का वादा किया था। ऐसा बताया जा रहा है कि चीन ने मंगोलिया और सिंगापुर के नेताओं से भी ऐसे ही वादे किए हैं।

Photo by 卡晨 / Unsplash

भारत के करीब 23 हजार छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए चीन वापस जाना चाहते हैं। लेकिन कोरोना के नाम पर चीन की तरफ से लगाए प्रतिबंधों की वजह से पिछले दो साल से इनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। छात्रों का कहना है बीजिंग उन्हें अपने देश में वापस आने की अनुमति दे जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके अलावा सैकड़ों व्यापारी, कर्मचारी और उनके परिवार पिछले साल से भारत में हैं जो चीन वापस जाना चाहते हैं। लेकिन चीन इनकी वापसी को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे रहा है। हालांकि इस मसले पर चीन ने मंगलवार को कहा कि वह विदेशी छात्रों की वापसी के लिए ‘समन्वित’ व्यवस्था करने पर विचार कर रहा है। लेकिन वह 23,000 से अधिक भारतीयों समेत अन्य विदेशी छात्रों की वापसी के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बता सकता।

बता दें कि बीजिंग के कोविड-19 वीजा प्रतिबंधों के कारण ये छात्र पिछले दो साल से अपने-अपने देशों में फंसे हुए हैं। मंगलवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि उनका मंत्रालय एक साल से अधिक समय से कह रहा है कि चीन कोविड-19 के सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार छात्रों की व्यवस्थित रूप से वापसी चाहता है। झाओ ने कहा कि चीन की सरकार विदेशी छात्रों की चीन को उनकी पढ़ाई के लिए वापसी के मुद्दे को काफी अहमियत देती है।

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