ब्रिटिश सिख इतिहासकार बेंस ने महाराजा दलीप सिंह की प्रदर्शनी के लिए उधार दिया अपना कला-संग्रह

यह कला संग्रह Sovereign, Squire and Rebel: Maharajah Duleep Singh & the Heirs of a Lost Kingdom लिखने वाले ब्रिटेन में बसे पीटर बैंस का है। प्रदर्शनी इस सप्ताह नॉर्विच के नॉरफोक रिकॉर्ड ऑफिस में लगाई गई है। यह सितंबर तक चलेगी।

ब्रिटिश सिख इतिहासकार बेंस ने महाराजा दलीप सिंह की प्रदर्शनी के लिए उधार दिया अपना कला-संग्रह

ब्रिटिश सिख इतिहासकार, लेखक और कला संग्राहक ने महाराजा दलीप सिंह पर लगाई जाने वाली प्रदर्शनी के लिए अपना निजी कला संग्रह उधारी पर दिया है। महाराजा दलीप सिंह पंजाब के आखिरी शासक थे जिन्हें औपनिवेशिक काल में ब्रिटेन निर्वासित कर दिया गया था।

यह कला संग्रह Sovereign, Squire and Rebel: Maharajah Duleep Singh & the Heirs of a Lost Kingdom लिखने वाले ब्रिटेन में बसे पीटर बैंस का है। Photo: NORFOLK COUNTY COUNCIL

यह कला संग्रह Sovereign, Squire and Rebel: Maharajah Duleep Singh & the Heirs of a Lost Kingdom लिखने वाले ब्रिटेन में बसे पीटर बैंस का है। प्रदर्शनी इस सप्ताह नॉर्विच के नॉरफोक रिकॉर्ड ऑफिस में लगाई गई है। यह सितंबर तक चलेगी। प्रदर्शनी का आयोजन Anglo Punjab Heritage Foundation ने किया है और इसमें Essex Cultural Diversity Project (ECDP) और उसके क्रिएटिव डायरेक्टर इंदी संधु ने मदद की है।

महाराजा दलीप सिंह को एल्वेडेन चर्चयार्ड में दफनाया गया है।

प्रदर्शनी को महाराजा रंजीत सिंह के पुत्र और उत्तराधिकारी दलीप सिंह पर लगाई अब तक की सबसे बड़ी प्रदर्शनी बताया जा रहा है। यह प्रदर्शनी ईस्ट एंग्लिया एंड पंजाब महोत्सव का हिस्सा है। प्रदर्शनी को लेकर पीटर बेंस ने कहा कि  ऐसा पहली बार हो रहा है जब आम लोगों को देखने के लिए इस तरह की ऐतिहासिक वस्तुएं रखी गई हैं। मुझे उम्मीद है कि कला प्रेमियों को भी वैसे ही अनुभव होगा जैसा कि मुझे उन्हें तलाश करने में हुआ था।

बैंस बताते हैं कि मेरी एक पसंदीदा आइटम महारानी विक्टोरिया द्वारा हस्ताक्षरित पत्रिका है। इसमें लिखा है- महाराजा दलीप सिंह के लिेए अपने एक स्नेही मित्र की ओर से...विंडसर कासल, 1868. बैंस ने बताया कि यह वास्तव में निहायत व्यक्तिगत और आंतरिक है जिसे पंजाब के शासक के साथ महारानी की मित्रता के तौर पर देखा जा सकता है। यह एक अलग बात है कि ब्रिटेन की सरकार का उनके साथ कैसा बर्ताव रहा।

प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षणों में महाराजा की मखमली भारतीय जैकेट शामिल हैं। शूटिंग और निशानेबाजी का सामान भी कम दिलचस्प नहीं है। राजकुमारियों के परिधान भी आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं। पारिवारिक फोटो अलबम और अपने निजी पत्र भी नुमाइश के लिए हैं। गौरतलब है कि बैंस बीते 25 वर्षों से ऐतिहासित कला संग्रह का काम कर रहे हैं। उन्हे उम्मीद है कि यह प्रदर्शनी ब्रिटिश भारतीयों की नई पीढ़ी को अपने इतिहास में झांकने का एक अवसर प्रदान करेगी।