विदेश जाने वाले लोगों को राहत, बूस्टर डोज के लिए नहीं लागू होगा यह नियम

विदेशों में यात्रा करने वाले भारतीयों विशेष रूप से छात्रों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि कई देशों ने बूस्टर या ए​हतियातन डोज प्रमाण पत्र के बाद ही अपने देश में आने की अनुमति दी हुई है।

विदेश जाने वाले लोगों को राहत, बूस्टर डोज के लिए नहीं लागू होगा यह नियम
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भारत सरकार ने विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों को बूस्टर डोज लगाने की अनुमति दे दी है। सरकार ने कहा है कि कोरोना महामारी के खिलाफ गंतव्य देश के दिशा-निर्देशों के तहत जरूरत होने पर भारतीय यात्रा से पहले बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। इसके लिए सरकार ने 9 महीने के अंतराल के अपने नियम को भी खत्म कर दिया है जो विदेश जाने वाले भारतीयों के सामने सबसे बड़ी बाधा बन रहा था।

भारत के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट करते हुए बताया कि भारतीय नागरिक और विदेश यात्रा करने वाले छात्र अब गंतव्य देश के दिशा-निर्देशों के अनुसार एहतियात के तौर पर बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। यह नई सुविधा जल्द ही भारत सरकार द्वारा इस महामारी के दौरान बनाए गए विशेष CoWIN पोर्टल पर उपलब्ध होगी।

Pharmacist preps Covid-19 vaccine
स्वास्थ्य मंत्रालय को उन लोगों की ओर से भी बूस्टर डोज को लेकर आवेदन प्राप्त हुए थे जिन्हें नौकरी, खेल, भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के रूप में बैठक करने के लिए विदेश जाना पड़ता है। Photo by Steven Cornfield / Unsplash

बता दें कि भारत के टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) ने हाल ही में इस संबंध में एक सिफारिश को मंजूरी दी थी। दरअसल विदेशों में यात्रा करने वाले भारतीयों विशेष रूप से छात्रों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि कई देशों ने बूस्टर या ए​हतियातन डोज प्रमाणपत्र के बाद ही अपने देश में आने की अनुमति दी हुई है।

यही नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय को उन लोगों की ओर से भी बूस्टर डोज को लेकर आवेदन प्राप्त हुए थे जिन्हें नौकरी, खेल, भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के रूप में बैठक करने के लिए विदेश जाना पड़ता है। काफी लोगों ने सरकार से मांग की थी कि बूस्टर डोज लेने की अवधि को छह महीने कर देना चाहिए तो कुछ ने दूसरी और बूस्टर खुराक के बीच नौ महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को कम करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से आग्रह किया था।

बता दें कि पिछले साल नवंबर में कोविशील्ड बनाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अदार पूनावाला और कोवैक्सिन बनाने वाली भारत बायोटेक के प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने तीसरी खुराक के लिए छह महीने के अंतराल पर जोर दिया था।