नौकरी जाने का ऐसा सदमा, वतन वापस नहीं आ पाया पंजाब का रंजीत

सरबत दा भला ट्रस्ट के संस्थापक व दुबई में कारोबारी डॉ. ओबराय के प्रयास से रंजीत सिंह का शव अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचाया गया। ट्रस्ट ने परिवार के आर्थिक हालात को देखते हुए रंजीत की पत्नी को 2500 रुपये प्रति माह और मां को 1000 रुपये प्रति माह देने का फैसला किया गया है।

नौकरी जाने का ऐसा सदमा, वतन वापस नहीं आ पाया पंजाब का रंजीत

भारत में पंजाब के अमृतसर के एक गांव मोहन भंडारियां के रहने वाले 37 साल के रंजीत सिंह बड़े अरमान लेकर नौकरी की खातिर दुबई गए थे। मन में एक सपना था कि परिवार को गरीबी से बाहर निकालना है और उन्हें बेहतर जिंदगी देना है। लेकिन किस्मत शायद उन पर इतनी मेहरबान नहीं थी। नौकरी से निकाले जाने की वजह से वह मानसिक हालात झेल नहीं पाए और दुबई में ही उनकी मौत हो गई। रविवार को एक संस्था की मदद से उनका शव भारत लाया गया।

दरअसल कुछ साल पहले पंजाब से दुबई पहुंचने के बाद रंजीत ने एक कंपनी में ड्राइवरी का काम शुरू किया। सब कुछ ठीक चलने लगा, रंजीत ने कुछ पैसे जोड़ने भी शुरू किए। लेकिन कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए हालात में उसकी कंपनी ने रंजीत को काम से जवाब दे दिया था। ऐसे में काम न होने के कारण वह भारी तनाव का सामना कर रहे थे। उन्हें अपने परिवार की चिंता सता रही थी। जिस मकसद से वह अपने गांव को छोड़कर दुबई आए थे, उस पर पानी फिर गया था।