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भारत में एक साथ 78,220 तिरंगा लहराने का विश्व कीर्तिमान, गिनीज बुक ने सौंपा प्रमाणपत्र

बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव में भोजपुर जिला में जगदीशपुर के दुलौर में 78,220 तिरंगा लहराने का विश्व कीर्तिमान स्थापित हुआ। इस समारोह को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम ने विश्व रिकार्ड के तौर पर दर्ज किया है।

भारत के राज्य बिहार के आरा के जगदीशपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती के मौके पर आयोजित विजयोत्सव के दौरान एकसाथ 78,220 तिरंगा लहराने का विश्व कीर्तिमान बनाया गया। इससे पहले एक साथ 50 हजार झंडा फहराने का रिकॉर्ड पाकिस्तान के नाम था। बिहार में इस रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए एक साथ 78 हजार से ज्यादा लोगों ने तिरंगा लहराया। यह नया विश्व रिकॉर्ड बना है।

आरा के जगदीशपुर में हुए कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने सबसे पहले राष्ट्रध्वज फहराया। अमित शाह के राष्ट्रध्वज फहराने के साथ ही वहां मौजूद तमाम लोग हाथ में झंडा लेकर खड़े हुए और अगले 5 मिनट तक हाथों में झंडा लहराते रहे।

बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव में भोजपुर जिला में जगदीशपुर के दुलौर में 78,220 तिरंगा लहराने का विश्व कीर्तिमान स्थापित हुआ। 23 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी के दौरान 78,220 लोगों ने अपने हाथों में तिरंगा फहरा कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने विश्व कीर्तिमान बनाने का प्रमाणपत्र सौंप दिया है।

इस समारोह को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम ने विश्व रिकार्ड के तौर पर दर्ज किया है। गिनीज बुक की टीम ने पूर्ण वैज्ञानिक तरीके से सभा में तिरंगा लहराते हुए लोगों की गणना की थी। इसके साक्षी गृह मंत्री अमित शाह एवं भारतीय जनता पार्टी के अन्य बड़े नेता बने। इससे पहले यह रिकार्ड पाकिस्तान के नाम था। एक मार्च 2014 को लाहौर के नेशनल हाकी स्टेडियम में 56,618 झंडे एक साथ लहराए गए थे।

इस कार्यक्रम के लिए बीते कई दिनों से तैयारी की जा रही थी। भाजपा के बड़े नेता और कई केंद्रीय मंत्री गांव-गांव जाकर लोगों को इसके आमंत्रित कर रहे थे। गिनीज बुक की टीम को पहले ही केंद्रीय कला एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से यहां रिकार्ड बनने की जानकारी दे दी गई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी छह सदस्यीय टीम को यहां पूरी प्रक्रिया को देखने के लिए भेजा था। पारदर्शी तरीके से तिरंगा लहराने की संख्या की पुष्टि करने के लिए गुड़गांव की एक आईटी कंपनी आईडी टेक साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई थी।

बाबू वीर कुंवर सिंह 80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। 

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी रहे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह को एक बेजोड़ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने और विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे। अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद उन्होंने कभी भी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके बल्कि उनका डटकर सामना किया।

बाबू कुंवर सिंह रामगढ़ के बहादुर सिपाहियों के साथ बांदा, रीवा, आजमगढ़, बनारस, बलिया, गाजीपुर एवं गोरखपुर में परचम लहरा रहे थे। इस, बीच कुंवर सिंह को अपनी गांव की मिट्टी याद आने लगी, वह अपने गांव की मिट्टी को चूमना चाहते थे। वह बिहार की ओर लौटने लगे, जब जगदीशपुर जाने के लिए गंगा पार कर रहे थे तभी उनकी बांह में एक अंग्रेज की गोली आकर लगी। उन्होंने अपनी तलवार से बांह काटकर गंगा मईया को सुपुर्द कर दिया। इस महान नायक का आखिरकार अदम्य वीरता का प्रदर्शन करते हुए 26 अप्रैल, 1858 को निधन हो गया।

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