विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों में पढ़ाई को लेकर आखिर यह बदलाव क्यों?

'एजुकेशन ओवरसीज- एन इवॉल्विंग जर्नी' शीर्षक नाम की इस स्टडी में पाया गया है कि 45 फीसदी छात्र आत्मनिर्भरता और अपनी शर्तों पर जीवन जीने के अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों में पढ़ाई को लेकर आखिर यह बदलाव क्यों?
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विदेश में पढ़ाई करने की चाह रखने वाले भारतीय छात्रों का पाठ्यक्रम को चुनने का तौर-तरीका अब बदलने लगा है। हाल ही में एक स्टडी के मुताबिक विदेश में अध्ययन करने के इच्छुक कम से कम 52 फीसदी छात्र अब विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर ध्यान देने की बजाय विशेष पाठ्यक्रम को तवज्जो देना ज्यादा पसंद करते हैं।

यह स्टडी जनवरी से जून के बीच 12 शहरों में की गई जिसमें 807 लोगों का सर्वेक्षण किया गया।Photo by Muhammad Rizwan / Unsplash

नीलसनआईक्यू की वैश्विक वित्तीय सेवा वेस्टर्न यूनियन द्वारा की गई स्टडी में यह भी सामने आया है कि लगभग 64 फीसदी छात्र उन देशों और विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने का विकल्प चुनते हैं जहां प्रवेश परीक्षा नहीं होती और न ही अंग्रेजी में दक्षता को लेकर कोई परीक्षा होती है।

स्टडी के मुताबिक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण जानकारी यही सामने आई है कि विदेश में पढ़ाई करने की इच्छा करने वाले छात्र ऐसे पाठयक्रमों की तलाश करते हैं जिसके आने वाले वक्त में ज्यादा महत्व है न कि आइवी लीग जैसे विश्वविद्यालय को चुनते हैं जो विश्व के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है लेकिन वहां कई पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाए जाते।