भारतीय अमेरिकी समुदाय ने कैलिफोर्निया के इस कानून का स्वागत क्यों किया

कैलिफ़ोर्निया में हाई स्कूल के छात्रों को स्नातक करने के लिए अनिवार्य रूप से लेनी होंगी जातीय अध्ययन कक्षाएं। सिख समुदाय ने नए कानून का तहे दिल से स्वागत किया है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने यूं तो विधेयक का समर्थन दिखाया है लेकिन पाठ्यक्रम के कुछ पहलुओं पर उन्हें ऐतराज है।

भारतीय अमेरिकी समुदाय ने कैलिफोर्निया के इस कानून का स्वागत क्यों किया
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अमेरिका स्थित कैलिफोर्निया राज्य के राज्यपाल गेविन न्यूजॉम ने हाल ही में एक कानूनी विधेयक पर हस्ताक्षर किए जो एथ्निक स्टडीस के विषय पर एक सेमेस्टर पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए कहता है। 1 जनवरी से लागू होने वाला यह कानून 2029-2030 स्कूल वर्ष में स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को प्रभावित करेगा। वहां रह रहे हिंदुओं और सिखों ने इस कानून का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने इसके कुछ पहलुओं पर ऐतराज जताया है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक समीर कालरा ने बताया कि उनकी संस्था एक जातीय अध्ययन पाठ्यक्रम का समर्थन करती है जो अन्य समुदायों के साथ हिंदू अमेरिकियों द्वारा किए गए कई योगदानों को साझा करता है। Photo by Dariusz Sankowski / Unsplash

हालांकि इस विधेयक को आलोचना का सामना करना पड़ा। इस विवादास्पद विधेयक के विरोध में आलोचकों का कहना है कि यह कानून कक्षा में क्रिटिकल रेस थ्योरी सिखाने का द्वार खोलता है। क्रिटिकल रेस थ्योरी अमेरिकी न्यायिक प्रणाली को प्रभावित करने वाले नस्लीय कारकों की भूमिका को संबोधित करती है। इस विवाद के इतर सिख समुदाय ने नए कानून का तहे दिल से स्वागत किया है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने यूं तो विधेयक का समर्थन दिखाया है लेकिन पाठ्यक्रम के कुछ पहलुओं पर उन्हें ऐतराज है।