देशभक्ति व्यक्त करने का प्रतीक बन गया है तिरंगा, इन नियमों को भी मानें

राष्ट्रीय ध्वज जब फट जाए या मैला हो जाए तो उसे मर्यादा के अनुकूल एकांत में नष्ट करना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज को फहराते या उतारते समय अथवा झंडे को परेड में वहां पर उपस्थित सभी लोग की ओर मुंह करके सावधान की मुद्रा में खड़े होंगे। राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग व्यावसायिक प्रायोजनों के लिए नहींं किया जा सकता।

देशभक्ति व्यक्त करने का प्रतीक बन गया है तिरंगा, इन नियमों को भी मानें

स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते-आते पूरे भारत वर्ष और दुनिया के उन हिस्सों में रहने वाले भारतीयों के मन में देश देश-प्रेम हिलोरे लेने लगता है ओर वह कई माध्यमों से इसे व्यक्त करने लग जाते हैं। देशभक्ति और प्रेम को इजहार करने का एक तरीका आजकल भारत का राष्ट्रीय ध्वज भी है, जिसे शानदार तीन रंगों के चलते तिरंगा भी कहा जाता है। यह तिरंगा भी भारत प्रेम को अभिव्यक्त करने का साधन बन रहा है।

इंडियन स्टार आपको राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास और उससे जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बता चुका है और यह भी जानकारी दे चुका है कि तिंरंगे के वर्तमान स्वरूप को बनने में कई दशक लगे और अब यह भारत का प्रतीक बन गया है। हमें यह भी याद रखना होगा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के भी कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। आइए आपको इन नियमों की जानकारी देते हैं, ऐसा होने से राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान भी कायम रहेगा और आप सम्मानपूर्वक राष्ट्रप्रेम को भी दर्शा सकेंगे।

राष्ट्रीय ध्वज है तो नियम भी होंगे

तिरंगे की शान को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा भारतीय झंडा संहिता-2002 में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं। भारतीय झंडा संहिता के अनुसार आम जनता, गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं आदि द्वारा राष्ट्रीय झंडे के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन झंडा फहराने में कुछ आवश्यक सावधानियों का ध्यान रखा जाना चाहिए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार झंडा संहिता में यह उल्लेख किया गया है कि झंडे को फहराते समय केसरिया रंग हमेशा ऊपर रहे और उसका आकार आयताकार होने के साथ साथ लंबाई व ऊंचाई का अनुपात 3.2 होना चाहिए।