धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भारत को रेड लिस्ट में डालने के लिए चल रही अमेरिकी आयोग में जंग

बीते वर्षों में आयोग ने दो बार प्रयास किया है कि अमेरिका का विदेश विभाग भारत के साथ 'विशेष चिंता वाले देश' (CPC) की तरह व्यवहार करे। इससे भारत चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों की श्रेणी में आ जाएगा जिन पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भारत को रेड लिस्ट में डालने के लिए चल रही अमेरिकी आयोग में जंग

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और उनके भारतीय समकक्ष डॉ. एस जयशंकर के बीच हाल ही में हुई बैठकों के दौरा एक दूसरे के देशों में मानवाधिकारों की स्थिति पर भी बात हुई थी। असल में इस वार्ता के पीछे एक बड़ी लड़ाई है जो अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) के गलियारों में लड़ी जा रही है। आयोग भारत को लेकर एक रिपोर्ट तैयार कर रहा है जिसे वह अमेरिकी विदेश विभाग को 25 अप्रैल को सौंपेगा।

बीते वर्षों में आयोग ने दो बार प्रयास किया है कि अमेरिका का विदेश विभाग भारत के साथ 'विशेष चिंता वाले देश' (CPC) की तरह व्यवहार करे। इससे भारत असल में चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों की श्रेणी में आ जाएगा जिन पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, यहां पर राहत की बात ये है कि दोनों ही बार अमेरिकी प्रशासन ने आयोग की इस सिफारिश को स्वीकार करने से इनकार किया है।

धार्मिक स्वतंत्रता मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन ने दो बार आयोग की सिफारिश को स्वीकार करने से इनकार किया है।

बता दें कि अमेरिका के कुछ नागरिक अधिकार समूहों ने आयोग को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि जो लोग भारत के धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की वास्तविकता को छिपाने की कोशिश करते आ रहे हैं, वे लोग अब आयोग को लगातार तीसरे वर्ष सीपीसी के रूप में भारत के पदनाम की सिफारिश करने से रोकने के लक्ष्य के साथ तीव्र पैरवी कर रहे हैं और इसके लिए बड़े स्तर पर संचार का उपयोग कर रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि हमें इस बात की जानकारी भी मिली है कि इस तरह की स्थिति में यूएससीआईआरएफ के आयुक्तों व अधिकारियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक उल्लेख को बाहर करने के लिए दबाव डाले जाने का एक प्रयास भी शामिल है। बता दें कि एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार को एक बयान में कहा था कि अमेरिका भारत में कुछ हालिया चिंताजनक घटनाओं पर नजर रख रहा है। इनमें मानवाधिकारों के उल्लंघन में तेजी शामिल है।

इसके एक दिन बाद यानी बुधवार को जयशंकर ने ब्लिंकन के बयान का खंडन करने के लिए वॉशिंगटन में एक प्रेस वार्ता की थी। उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच हुई टू प्लस टू वार्ता में मानवाधिकार चर्चा का मुद्दा नहीं थे। उन्होंने कहा था कि लोग भारत के बारे में अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन हम भी बाकी लोगों के मानवाधिकारों की स्थितियों पर अपने विचार रखते हैं और इन देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है।