न्यू जर्सी में खुला BAPS अक्षरधाम मंदिर का शाेध संस्थान, जानिए विशेषताएं

इस मंदिर के निर्माण के बारे में सबसे रोचक तथ्य यह है कि इसमें इस्तेमाल किए गए पत्थर यूरोप से लाए गए थे और इन्हें कई वर्षों तक भारत के राजस्थान में हाथ से तैयार किया गया था। इटली से लाए गए तराशे हुए पत्थरों से बना हुआ यह मंदिर अपने आप में एक आश्चर्य है।

न्यू जर्सी में खुला BAPS अक्षरधाम मंदिर का शाेध संस्थान, जानिए विशेषताएं

अमेरिका के न्यू जर्सी में स्थित अक्षरधाम मंदिर ने रॉबिंसविले में एक नए शोध संस्थान की शुरुआत की है, जिसे बीएपीएस स्वामीनारायण रिसर्च इंस्टीट्यूट (BAPS Swaminarayan Research Institute) नाम दिया गया है। इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में खुला स्वामीनारायण परंपरा में भारतीय भाषाओं और हिंदू शास्त्रों का अध्ययन करने और उन पर शोध करने के लिए अपनी तरह का पहला केंद्र बताया जा रहा है।

प्रमुख स्वामी महाराज की देखरेख में साल 2010 में इस मंदिर को लेकर विचार शुरू हुआ था। 

इस संस्थान के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार किया गया और बच्चों ने संस्कृत के श्लोक पढ़े। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम का पूरी दुनिया में लाइव प्रसारण किया गया था और इसमें 50 से अधिक हिंदू मंदिरों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी। भारत के गुजरात के अहमदाबाद से महंत स्वामी महाराज वर्चुअल माध्यम से दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

मंदिर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि यह रिसर्च संस्थान अध्ययन की सभी शाखाओं में सर्वोच्च स्तर की एकेडमिक एक्सीलेंस को प्रोत्साहित करने का काम करेगा। उल्लेखनीय है कि न्यू जर्सी के रॉबिंसविले में स्थित अक्षरधाम मंदिर अमेरिका के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। बता दें कि यह मंदिर लगभग 160 एकड़ में फैला हुआ है। साल 2014 में यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुला था।

प्रमुख स्वामी महाराज की देखरेख में साल 2010 में इस मंदिर के निर्माण पर विचार शुरू हुआ था। न्यू जर्सी में अक्षरधाम मंदिर की कहानी आश्चर्यचकित करने वाले तथ्यों से भरी हुई है। भारत से हजारों मील दूर इतने विशाल और खूबसूरत हिंदू मंदिर का निर्माण यूरोप से भारत और अमेरिका तक एक बहुआयामी प्रक्रिया थी। इटली से लाए गए तराशे हुए पत्थरों से बना हुआ यह मंदिर अपने आप में एक आश्चर्य है।

इस मंदिर के निर्माण के बारे में सबसे रोचक तथ्य यह है कि इसमें इस्तेमाल किए गए पत्थर यूरोप से लाए गए थे और इन्हें कई वर्षों तक भारत के राज्य राजस्थान में हाथ से तैयार किया गया। राजस्थान के लगभग 2000 कलाकारों ने पत्थर के टुकड़ों के खूबसूरत कलाकृतियों में तब्दील किया था। कुशल कारीगरों की एक टीम ने अमेरिका में उनकी संख्या के अनुसार टुकड़ों को एकत्र और व्यवस्थित किया था।

मंदिर की मुख्य इमारत चार मंजिल की है। यहां भारत की विरासत, इतिहास और संस्कृति को समर्पित एक स्थाई प्रदर्शनी भी है। मंडप परिसर में एक विशाल प्रार्थना कक्ष है। इसमें एक साथ 1000 लोग प्रार्थना कर सकते हैं। बेहद जटिल प्रक्रिया से बने इस मंदिर की ऊंचाई 42, चौड़ाई 87 और लंबाई 133 फीट है। पूरे मंदिर के निर्माण में 15 करोड़ डॉलर (1174 करोड़ 30 लाख 50 हजार रुपये) का खर्च आया था।