ये दो मसले AIA की 'आत्मा' में बसे हैं, विमर्श के लिए फिर किया सम्मेलन

पहले सत्र की तरह ही इस बार भी शिवाजी सेनगुप्ता ने चर्चा का नेतृत्व किया। मॉडरेटर अस्मिता भाटिया ने वर्तमान सत्र के मापदंडों को स्पष्ट करके चर्चा शुरू करने में मदद की। भाटिया ने कहा कि जागरूकता और सहानुभूति का उपयोग निजी, कॉर्पोरेट और राजनीतिक कई स्थितियों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

ये दो मसले AIA की 'आत्मा' में बसे हैं,  विमर्श के लिए फिर किया सम्मेलन

जागरूकता और सहानुभूति पर एक सफल सत्र को पूरा करने के ठीक एक महीने अब हाल ही में एक बार एसोसिएशन ऑफ इंडियंस इन अमेरिका (AIA) ने अपना दूसरा सम्मेलन आयोजित किया। जागरूकता और सहानुभूति पर किए गए इस सम्मेलन में AIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोबिंद मुंजाल ने बताया कि  इन दोनों को कौशल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

पहले सत्र की तरह ही इस बार भी शिवाजी सेनगुप्ता ने चर्चा का नेतृत्व किया।

मुंजाल ने सम्मेलन में कुछ पूर्व अध्यक्षों और ट्रस्टियों सहित सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने स्पीकर डॉ. शिवाजी सेनगुप्ता और AIA की ट्रस्टी मॉडरेटर अस्मिता भाटिया का परिचय कराया। पहले सत्र की तरह ही इस बार भी शिवाजी सेनगुप्ता ने चर्चा का नेतृत्व किया। मॉडरेटर अस्मिता भाटिया ने वर्तमान सत्र के मापदंडों को स्पष्ट करके चर्चा शुरू करने में मदद की। भाटिया ने कहा कि जागरूकताऔर सहानुभूति का उपयोग निजी, कॉर्पोरेट और राजनीतिक कई स्थितियों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। वहीं गोबिंद मुंजाल के सुझाव पर सेनगुप्ता ने जागरूकता और सहानुभूति के बारे में एक बार​ फिर उपस्थित लोगों को बताया।

इसके बाद शिवाजी सेनगुप्ता ने इस विषय पर कहा कि जागरूकता और सहानुभूति दोनों अवस्थाएं हैं। इसमें आप किसी न किसी के बारे में जानते हैं या आप किसी अन्य व्यक्ति के साथ सहानुभूति की स्थिति में हैं। उन्होंने समझाया कि सभी में जागरूकता और सहानुभूति है। इन दोनों को कौशल के रूप में विकसित किया जा सकता है। ऐसा तभी संभव है जब हम जागरूकता और सहानुभूति में परिणत होने वाले उप-कौशल का लगातार अभ्यास करें।

डॉ. सेनगुप्ता के विचारों से सदस्यों के बीच एक जीवंत चर्चा हुई। उन्होंने एक-दूसरे की बातों को उठाया और विस्तार से बातचीत की। गुंजन रस्तोगी ने पूछा कि जब चर्चा में शामिल पक्षों में से कोई एक शत्रुतापूर्ण और आक्रामक हो जाता है तो कोई क्या करता है? इस पर सेनगुप्ता ने जवाब दिया कि उस शख्स से अस्थायी रूप से दूरी बना लेनी चाहिए और बातचीत के सभी रास्तों को खोले रखना चाहिए ताकि उस व्यक्ति को पता चले कि बातचीत के सभी रास्ते खुले हैं और वह एक बार फिर शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा में शामिल हो सके।

कार्यक्रम में मौजूद रहे सभी सदस्यों ने जागरूकता और सहानुभूति पर किए गए इस सम्मेलन को जीवंत और बौद्धिक चर्चा से भरा बताते हुए एक सफल कार्यक्रम बताया। इतना ही नहीं इन सम्मेलन को जारी रखने पर भी चर्चा की गई। मुंजाल ने बताया कि वे उन सभी को रिकॉर्डिंग भेजेंगे जो पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण सत्र में शामिल नहीं हो पाए थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय सचिव गुंजन रस्तोगी के धन्यवाद ज्ञापन से रात 9:30 बजे हुआ।