डॉ. मोक्षराज

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📍 Jaipur
विशेष लेखः वास्कोडिगामा 'सोने की चिड़िया' भारत को ढूंढ रहा था, क्यों ?
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विशेष लेखः वास्कोडिगामा 'सोने की चिड़िया' भारत को ढूंढ रहा था, क्यों ?

इटालियन क्रिस्टोफ़र कोलंबस समृद्ध भारत की खोज करने क्यों निकला, क्या भारत दुनिया के नक़्शे से ग़ायब था? या आर्यावर्त्त के सुखी संपन्न नागरिक लुप्त हो गए थे? इतिहास के पन्नों में ये कैसा मज़ाक लिखा है कि अमेरिका की खोज कोलंबस ने और भारत की खोज वास्कोडिगामा ने की!

विशेष लेखः अमेरिका में पहली बार मिला था योग व संस्कृति शिक्षण का अवसर
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विशेष लेखः अमेरिका में पहली बार मिला था योग व संस्कृति शिक्षण का अवसर

यह एक संयोग ही था कि अमेरिका में अपने विशेष उद्बोधन के कारण प्रसिद्ध हुए स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को ही थी, जिसे भारत में युवा दिवस या कैरियर्स डे के रूप में मनाया जा रहा था और मेरी अमेरिकी यात्रा के लिए भी यही दिवस तय हुआ।

विशेष लेख: परदेस जाकर भी अपनी पहचान न मिटने दें
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विशेष लेख: परदेस जाकर भी अपनी पहचान न मिटने दें

परदेस में रह कर भी अपने देश के सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को न छोड़ने की सीख मुझे महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश के दशवें समुल्लास से ही मिली। वह कहते थे कि परदेस में रहकर अपने खान-पान व आचरण को नहीं बिगाड़ना चाहिए।

विशेष लेखः यज्ञोपवीत के 3 धागे तीन लोकों के प्रति नैतिक कर्त्तव्य निर्वहन का बोध कराते हैं
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विशेष लेखः यज्ञोपवीत के 3 धागे तीन लोकों के प्रति नैतिक कर्त्तव्य निर्वहन का बोध कराते हैं

यज्ञोपवीत धारण करने की परंपरा 2500 वर्ष पहले तक पूरे विश्व में विद्यमान थी तथा अन्य मतावलंबियों की उद्दण्डता के कारण अब यह परंपरा भारत में ही रह गई है। मुझे भारत की संस्कृति का यह चिह्न किसी भी प्रकार के अन्य धार्मिक एवं परवर्ती सभ्यताओं के बाह्य चिह्नों से कमतर नहीं लगता है।

नेटिव इंडियन अमेरिकन्स के पूर्वज भी रखते थे मोटी चोटी या जटा, जानें कारण
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नेटिव इंडियन अमेरिकन्स के पूर्वज भी रखते थे मोटी चोटी या जटा, जानें कारण

भारत में उद्दण्ड धनानंद के सम्मुख आचार्य चाणक्य की खुली हुई शिखा जहां वैदिक परंपरा का प्रमाण देती है वहीं एक बुद्धिमान महानायक के माध्यम से चोटी रखने के कारणों को जानने में रुचि भी उत्पन्न करती है।

धरती की रक्षा व किसानों की समृद्धि के लिए खादी का उपयोग
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धरती की रक्षा व किसानों की समृद्धि के लिए खादी का उपयोग

विश्व में कृषि विद्या के प्रथम प्रयोक्ता भारतीय किसान ही हैं तथा उन किसानों तक आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए हमें खादी का उपयोग करना चाहिए ।

हमारे शरीर तथा पंचभूतात्मक ब्रह्मांड को संतुलित करने के लिए भी आवश्यक है यज्ञ
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हमारे शरीर तथा पंचभूतात्मक ब्रह्मांड को संतुलित करने के लिए भी आवश्यक है यज्ञ

यज्ञ में ध्वनि विज्ञान, पदार्थ विद्या, पशुपालन विद्या, जल-वायु विद्या, वृष्टि विज्ञान, कृषि-आर्युर्वेद तथा मानसिक चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक शक्ति के रहस्य भी छिपे हुए हैं।