डॉ श्रीधर कृष्णस्वामी

डॉ श्रीधर कृष्णस्वामी

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'यूकेन पर रूसी आक्रमण के 100 दिन पूरे' सभी के लिए दुखदायी हैं
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'यूकेन पर रूसी आक्रमण के 100 दिन पूरे' सभी के लिए दुखदायी हैं

रूसी संघ के जबरदस्त आर्थिक व्यवधान के चलते चाहे मास्को में बैठे अधिकारी इसे स्वीकार करना चाहें या नहीं लेकिन इसका प्रभाव कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान जैसे देशों पर भी पड़ रहा है।

विशेष लेख: भारत ढुलमुल नहीं है राष्ट्रपति बाइडेन जी... यह समझदारी है उसकी
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विशेष लेख: भारत ढुलमुल नहीं है राष्ट्रपति बाइडेन जी... यह समझदारी है उसकी

नई दिल्ली के पास देखने के लिए अन्य चीजें हैं, विशेष रूप से चीन जैसे परेशान करने वाला पड़ोसी और बीजिंग पर लगाम के लिए वाशिंगटन और मॉस्को की तरफ देखना। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इस खेल में किसी पक्ष को छोड़ा नहीं जा सकता और दोनों ही परिदृश्य भारत के हित में नहीं हैं।

विशेष लेखः पाकिस्तान की चीयरलीडर भूमिका से अफगानिस्तान को मदद नहीं मिल रही!
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विशेष लेखः पाकिस्तान की चीयरलीडर भूमिका से अफगानिस्तान को मदद नहीं मिल रही!

स्वीडन के विकास मंत्री ने एक एजेंसी की रिपोर्ट में कहा है कि देश पतन के कगार पर है और यह पतन हमारे विचार से तेजी से आ रहा है। मंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि यह पतन आतंकवादी समूहों के पनपने के लिए वातावरण तैयार करेगा।

भारत और दुनिया को सांस लेने के लिए अभी मीलों दूर जाना है!
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भारत और दुनिया को सांस लेने के लिए अभी मीलों दूर जाना है!

भारत जैसे विकासशील देशों को न केवल अपने लोगों की शेष आशंकाओं को दूर करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी काम करना चाहिए कि उनकी आबादी मास्क पहनने, बार-बार हाथ धोने के प्रोटोकॉल को त्यागने के आसान रवैये के जाल में न फंसे।

विशेष लेखः 9/11 की आतंकी घटना अमेरिकियों की यादों में भीतर तक धंसी है
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विशेष लेखः 9/11 की आतंकी घटना अमेरिकियों की यादों में भीतर तक धंसी है

अमेरिका और विश्व ने 9/11 हमलों की 20वीं वर्षगांठ मनाई, लेकिन कुछ लोग ही कह सकते हैं कि दुनिया सुरक्षित है। तथ्य यह है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बारे में विश्व समुदाय आशंकित है। यह उस संगठन के बारे में बताता है, जिसने ओसामा बिन लादेन और अल कायदा को आश्रय देकर आंतकवाद को बढ़ावा दिया।

विशेष लेख: तालिबान का पक्ष लेने वाले देश क्या वाकई गंभीरता दिखा रहे हैं?
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विशेष लेख: तालिबान का पक्ष लेने वाले देश क्या वाकई गंभीरता दिखा रहे हैं?

अमेरिकी सैनिकों ने तय समय सीमा से पहले ही अफगानिस्तान छोड़ दिया है। लेकिन देखने वाली बात होगी कि अमेरिका काबुल हमले में मारे गए 13 सैनिकों का बदला कैसे लेगा।

विशेष लेख: अफगानिस्तान पर क्या अमेरिका ने इतिहास से सबक नहीं सीखा
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विशेष लेख: अफगानिस्तान पर क्या अमेरिका ने इतिहास से सबक नहीं सीखा

भारत के पास चिंतित होने के कई कारण हैं। पाकिस्तान के साथ तालिबान की सांठगांठ को देखते हुए यह माना जा रहा है कि पाक आतंकवादियों को भेजने के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करेगा।

भारत की आजादी के 75 साल पूरे, देश के इस सफर पर चिंतन जरूरी!
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भारत की आजादी के 75 साल पूरे, देश के इस सफर पर चिंतन जरूरी!

आज भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति ही नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जाता है। यह सब तब है जब भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान द्वारा भड़काए जा रहे आतंकवाद और अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता हथियाने की आशंका का सामना कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की तलाश में भारत, क्या हैं रुकावटें
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की तलाश में भारत, क्या हैं रुकावटें

प्रमुख शक्तियां संयुक्त राष्ट्र में एक पुरानी प्रणाली से चिपके रहने की इच्छुक हैं, जिसका वर्तमान विश्व राजनीति से कोई संबंध नहीं है। निरंतर आगे बढ़ रहे देश अब UNSC में बदलाव का मसला लगातार उठा रहे हैं।

अफगानिस्तान में तालिबान के साथ उभर रहे कई खतरे, जानें क्या होगा भविष्य
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अफगानिस्तान में तालिबान के साथ उभर रहे कई खतरे, जानें क्या होगा भविष्य

अमेरिकी और नाटो के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान पूरे देश में तेजी से पैर पसार रहा है, जो सभी के लिए खतरा बन रहा है। इसकी आड़ में कई आतंकी संगठन दोबारा खड़े हो रहे हैं।