डॉ. रामेश्वर दयाल

डॉ. रामेश्वर दयाल

संपादक। करीब 32 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता में कार्यरत। भारत के कई जाने-माने समाचार पत्रों में कार्य का अनुभव। देश के राजनैतिक चरित्र की समझ। जमीनी पत्रकारिता से जुड़ाव। DU से पत्रकारिता में पीएचडी।

श्रीराम मंदिर के गर्भगृह का निर्माण 1 जून से शुरू, अब तक क्या-क्या हो चुका है?
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श्रीराम मंदिर के गर्भगृह का निर्माण 1 जून से शुरू, अब तक क्या-क्या हो चुका है?

पहली जून को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि के मृगशिरा नक्षत्र व आनंद योग के शुभ मुहूर्त पर गर्भगृह का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ राममंदिर के गर्भगृह के स्तंभ की पहली शिला रखेंगे। इस अवसर पर परिसर में ट्रस्टी सहित संत-धर्माचार्य भी मौजूद रहेंगे।

महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली में श्रीराम की बातें, क्या संदेश देना चाहते हैं मोदी?
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महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली में श्रीराम की बातें, क्या संदेश देना चाहते हैं मोदी?

प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता यह है कि वह प्रतीकों के माध्यम से अर्थपूर्ण संदेश देने में माहिर हैं। इसी के चलते उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नेपाल स्थित भगवान बुद्ध की जन्मस्थली पर पूजा-अर्चना की और भगवान श्रीराम को लेकर संदेश भी छोड़ दिया।

शहबाज भी अगर कश्मीर पर रगड़ मारते रहे तो भारत से न बन पाएगी
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शहबाज भी अगर कश्मीर पर रगड़ मारते रहे तो भारत से न बन पाएगी

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को देखिए। उन्होंने शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और कहा भारत आतंक मुक्त क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है। दोनों पड़ोसी देशों का नजरिया साफ है। पाकिस्तान की सुईं आज भी कश्मीर पर रगड़ खा रही है तो भारत विश्व की गंभीर समस्या आतंकवाद पर बात करना चाहता है।

राजनीति के शतरंज में लंगड़ी चाल चलती बीजेपी को मोदी ने अश्वमेधी बनाया
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राजनीति के शतरंज में लंगड़ी चाल चलती बीजेपी को मोदी ने अश्वमेधी बनाया

आज भारत की प्रमुख राजनैतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। मशहूर साहित्यकार प्रेमचंद ने कहा था कि उनके जीवन में हलके-फुलके गड्ढे तो हैं लेकिन पहाड़ और खाइयां नहीं है। लेकिन बीजेपी के मार्ग में पहाड़ और खाईयां बहुत रही हैं। पढ़िए इस पार्टी के अश्वमेध बनने की कहानी।

दो साल के बाद खेली जा रही है होली, भारत की पुरानी होली को याद कीजिए, मजा आएगा
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दो साल के बाद खेली जा रही है होली, भारत की पुरानी होली को याद कीजिए, मजा आएगा

भारतीय प्रवासी, जो विदेशों में बैठकर होली को याद कर रहे हैं, उन्हें हम बता रहे हैं कि भारत के महानगरीय चरित्र में होली पर क्या बदलाव हुए हैं। हमारा प्रयास है कि जब वे इस लेख को पढ़ें तो उन्हें अपने ‘वतन’ की होली याद आ जाए। अब भारत की होली में सब कुछ भी है लेकिन बदलाव भी हो गया है।

हुमायूं मकबरे के डिजाइन से प्रेरित है ताजमहल, जन्नत के बाग जैसा है नजारा
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हुमायूं मकबरे के डिजाइन से प्रेरित है ताजमहल, जन्नत के बाग जैसा है नजारा

मकबरा एक ऊंचे, चौड़े सीढ़ीदार चबूतरे पर बना है, जिसके चारों तरफ अंदर जाने के गहरे रास्ते व अंदर कोठरियां है। मकबरे का डिजाइन अष्टकोणीय है जिसमें चार लंबी मीनारें हैं। इस पर 42.5 मीटर ऊंचे संगमरमर के दो गुंबद हैं। संरचना लाल बलुआ पत्थर में सफेद और काले रंग की संगमरमर को मिलाकर बनाई गई है।

भारत के राज्यों की संस्कृति, जीवन शैली, हस्तकला व खानपान को दर्शाते हैं दिल्ली हाट
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भारत के राज्यों की संस्कृति, जीवन शैली, हस्तकला व खानपान को दर्शाते हैं दिल्ली हाट

पहला दिल्ली हाट साउथ दिल्ली स्थित आईएनए में वर्ष 1994 में बना। उत्तरी दिल्ली स्थित पीतमपुरा में वर्ष 2008 में दूसरा और पश्चिमी दिल्ली स्थित जनकपुराी में भी वर्ष 2013 में तीसरा हाट बना। ये देश के सांस्कृतिक केंद्र के रूप से मशहूर हो चुके हैं। ऐसा लगता है कि पूरा भारत एक ही स्थल पर सिमट आया हो।

भारत सरकार अपने निर्णय पर पलटी, कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा
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भारत सरकार अपने निर्णय पर पलटी, कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा

आज सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मैं देश वासियों के क्षमा मांगते हुए, सच्चे मन से कहना चाहता हूं कि हमारे प्रयास में कमी रही होगी कि हम उन्हें (किसानों को) समझा नहीं पाए। दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने इसे किसानों के आंदोलन की जीत बताया है।

अब न खील-बताशे, न टेसू और न झांझी, हाइटेक हो गई है अब दीपावली
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अब न खील-बताशे, न टेसू और न झांझी, हाइटेक हो गई है अब दीपावली

भारत के अधिकतर राज्यों में कुछ साल पहले तक दीपावली उमंगों का पर्व हुआ करती थी। इस पर्व से पहले और बाद तक लोगों में एक अलग ही रंगत और अपनापन दिखाई देता था। आज हम आपको बता रहे हैं कि सालों पहले इस दीपोत्सव को कैसे मनाया जाता था।

पर्व तो सारे शानदार, लेकिन दीपावली की बात कुछ और है
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पर्व तो सारे शानदार, लेकिन दीपावली की बात कुछ और है

भारत का पौराणिक पर्व है दीपावली। अब तो विदेश में इसकी हलचल तेजी से बढ़ रही है। विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी इस पर्व को लेकर खासे उत्सुक और उमंग से भर जाते हैं। आखिर ऐसा क्या है ‘अधंकार से उजाले की ओर’ ले जाने वाले इस पर्व में। उसका कारण यही है कि यह ऐसा पर्व है सबको जोड़ता है।

100 करोड़ वैक्सीन डोज आंकड़ा नहीं, समर्थ भारत की तस्वीर है: पीएम मोदी
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100 करोड़ वैक्सीन डोज आंकड़ा नहीं, समर्थ भारत की तस्वीर है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली दिवाली हर किसी के मन में एक तनाव था, लेकिन इस दिवाली 100 करोड़ वैक्सीन डोज के कारण एक पैदा हुआ विश्वास है। अगर मेरे देश की वैक्सीन मुझे सुरक्षा दे सकती है, तो मेरे देश में बने सामान मेरी दिवाली को और भी भव्य बना सकते हैं।

भारत में कोरोना के लगे 1,00,00,00,000 टीके
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भारत में कोरोना के लगे 1,00,00,00,000 टीके

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस ने भारत की तारीफ में एक ट्वीट कर लिखा- “बधाई हो, पीएम नरेंद्र मोदी, वैज्ञानिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और भारत के लोगों को COVID19से कमजोर आबादी की रक्षा करने और वैक्सीन इक्विटी लक्ष्यों को प्राप्त करने के आपके प्रयासों के लिए।"

लालकिला पर मनता था जश्न, होते थे, दंगल और भी बहुत कुछ…
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लालकिला पर मनता था जश्न, होते थे, दंगल और भी बहुत कुछ…

इस उत्सव में ग्रामीण व दूरदराज की महिलाओं की भागीदारी भी गजब होती। वे भी पुरानी दिल्ली की ओर कूच करती। इनमें बुजुर्ग महिलाएं लालकिला पहुंच जाती तो बाकी जनाना पार्क (सुभाष पार्क के सामने पर्दा बाग) में रुक जाती। वहीं पर ही पूरा दिन बिताया जाता।

किस्सा-ए-पतंगबाजी: माशूक की संदेश वाहक तो अंग्रेजों को चिढ़ाने में मददगार
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किस्सा-ए-पतंगबाजी: माशूक की संदेश वाहक तो अंग्रेजों को चिढ़ाने में मददगार

पुरानी दिल्ली में पहले ईद, शबे-बरात, बैसाखी, वसंत पंचमी, मकर संक्रांति और सावन के त्योहारों में खूब पतंगबाजी होती थी लेकिन अब लोग 15 अगस्त के आसपास ही पतंग उड़ाते हैं। आज हम आपको पुरानी दिल्ली के पतंग बाजार लाल कुआं से लेकर पतंगबाजी के किस्से सुना रहे हैं।

लाल किला पर तिरंगा फहराने में नेहरू प्रथम, कुछ पीएम जीरो भी रहे
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लाल किला पर तिरंगा फहराने में नेहरू प्रथम, कुछ पीएम जीरो भी रहे

इनमें दूसरे नंबर पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 16 बार, मनमोहन सिंह ने 10 बार और नरेंद्र मोदी अब आठवीं बार लाल किला की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराने जा रहे हैं।

नई दिल्ली में किसानों का धरना खत्म, आंदोलन जारी, केंद्र से नहीं मिला आश्वासन
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नई दिल्ली में किसानों का धरना खत्म, आंदोलन जारी, केंद्र से नहीं मिला आश्वासन

संयुक्त किसान मोर्चे के जनरल सेक्रेटरी युद्धवीर सिंह ने दावा किया कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के जरिए हम सरकार तक अपनी आवाज को पहुंचाने में सफल रहे। उन्होंने जानकारी दी कि अब सितंबर में मुजफ्फर नगर में संयुक्त किसान मोर्चे के बैनर तले किसानों की एक महापंचायत आयोजित की जाएगी

पुराने वक्त में कैसी थी पुरानी दिल्ली, क्या-क्या थी खास बातें

पुराने वक्त में कैसी थी पुरानी दिल्ली, क्या-क्या थी खास बातें

पुरानी दिल्ली में बड़ा बदलाव 1980 के दशक तक आते आते शुरू हो गया था। वरना उससे पहले और मुगलकाल तक उसमें कोई खासा बदलाव नहीं हुआ था। कभी वह दौर था कि अलसुबह ही यहां जगार हो जाती। मंदिरों से आरती और घंटे-घड़ियाल गूंजते तो मस्जिदों से अजान सुनाई देती।

फूलों की थाली सजाने का मन बना लीजिए, श्रीराम के 'दर्शन' का समय निश्चित हो चुका है
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फूलों की थाली सजाने का मन बना लीजिए, श्रीराम के 'दर्शन' का समय निश्चित हो चुका है

आज जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार श्रीराम मंदिर मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने कहा है कि रामलला के भव्य मंदिर का पहला तल साल 2023 के दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस तल में नाट्य मंडप और गर्भगृह होंगे। इस तल के तैयार होने के साथ ही भक्तों को रामलला के दर्शन का अवसर मिलने लगेगा।

करीब छह माह बाद आंदोलनकारी किसानों का दिल्ली में प्रवेश, फिलहाल शांति
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करीब छह माह बाद आंदोलनकारी किसानों का दिल्ली में प्रवेश, फिलहाल शांति

जंतर-मंतर पर रोज अलग-अलग सत्र आयोजित होंगे, जिनमें प्रश्नकाल तो होगा ही साथ ही रोज अलग-अलग नेताओं को किसान संसद के संचालन के लिए स्पीकर और डिप्टी स्पीकर भी बनाया जाएगा।

प्यार की ऐसी परिभाषा नीरज ही दे सकते हैं, फिल्मों में मन तो रमा लेकिन वहां प्रवासी ही बने रहे
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प्यार की ऐसी परिभाषा नीरज ही दे सकते हैं, फिल्मों में मन तो रमा लेकिन वहां प्रवासी ही बने रहे

पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित गोपाल दास नीरज के कई गीत लोग आज भी गुनगुनाते हुए दिख जाते हैं। देवानंद की फिल्म ‘प्रेम-पुजारी’ और ‘गैंबलर’ के गीत तो आज भी सबकी जुबां पर हैं, ऐसे ही राजकपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का गीत ‘ऐ भाई जरा देख के चलो’ आज भी संगीत प्रेमियों के बीच अपनी जगह बनाए हुए है।

कनॉट प्लेस के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप!
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कनॉट प्लेस के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप!

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस को कौन नहीं जानता। क्या आपको मालूम है कि जहां कनॉट प्लेस बना है, वहां पहले दो गांव हुआ करते थे। यह ठीक है कि अंग्रेजों ने इसे 'बाजार' के रूप में विकसित किया, लेकिन कभी रिहायशी इलाका भी हुआ करता था। कनॉट प्लेस के बारे में पढ़िए रोचक व अनकहे किस्से।

इस ‘वाहन’ को देखो, पूरा इतिहास छिपा है इस फटफटिया में!
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इस ‘वाहन’ को देखो, पूरा इतिहास छिपा है इस फटफटिया में!

सिखों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से पूरे विश्व में रुतबा कायम किया है। हम आपको ऐसी जानकारी दे रहे हैं कि किस तरह पाकिस्तान से आए सिखों ने फटफटिया चलाया और बाद में दिल्ली में अपने को स्थापित किया।

पुरानी दिल्ली की इन हवेलियों को जरा देख तो लें!
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पुरानी दिल्ली की इन हवेलियों को जरा देख तो लें!

पुरानी दिल्ली याद आते ही भीड़ भरी दुनिया समझ में आती है, जहां कब्जों की भरमार है और लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। लेकिन इस वॉल्ड सिटी का अलग रूप भी है। वहां की कुछ हवेलियां जो आपका मन मोह लेंगी। अगर जर्जर भी हैं ये हवेलियां तो भी इनका गुरूर नजर आता है।

जल्द लौटने वाली है चांदनी चौक की 'चांदनी'
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जल्द लौटने वाली है चांदनी चौक की 'चांदनी'

मुगल शासक शाहजहां के वक्त में बनाया गया चांदनी चौक बाजार एक बार फिर से अपनी पुरानी रंगत में आने वाला है। इस बाजार का नए सिरे से सौंदर्यीकरण किया गया है। उम्मीद है कि इस साल में यह बाजार टूरिस्ट स्पॉट बन जाएगा।