ऑस्ट्रेलिया का ग्लोबल टैलेंट वीजा, गांधी को महज 6 महीने में कैसे मिल गया!

मयंक अप्रैल 2019 में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पहुंचे थे। मयंक का कहना है कि उन्होंने प्रतिष्ठित संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश के आधार पर ग्लोबल टैलेंट वीजा के लिए आवेदन किया था और छह महीने बाद उन्हें वीजा के लिए ‘गोल्डन ईमेल’ आया।

ऑस्ट्रेलिया का ग्लोबल टैलेंट वीजा, गांधी को महज 6 महीने में कैसे मिल गया!

ऑस्ट्रेलिया का ग्लोबल टैलेंट वीजा कार्यक्रम इस देश में रहने और काम करने के लिए दुनिया भर में प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करता है। हाल ही में कई भारतीयों को यह वीजा दिया गया है। इनमें से एक नाम है कारोबारी मयंक गांधी का। उन्हें ऑस्ट्रेलिया में आने के महज तीन साल बाद इसी महीने ग्लोबल टैलेंट इंडिविजुअल वीजा मिला है।

मयंक अप्रैल 2019 में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पहुंचे थे। वह बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में भविष्य को बेहतर बनाने, कौशल और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने जैसे कई क्षेत्रों में प्रतिभाशालियों की तलाश में कार्य कर रहे थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपने व्यवसाय में तेजी लाने के लिए अपना नाम इस वीजा के लिए प्रस्तावित किया था। मयंक का कहना है कि उन्होंने प्रतिष्ठित संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश के आधार पर ग्लोबल टैलेंट वीजा के लिए आवेदन किया था। मयंक गांधी ने 30 सितंबर 2021 को अपनी रुचि का इजहार (EOI) जमा किया और छह महीने बाद उन्हें वीजा के लिए ‘गोल्डन ईमेल’ आया।

मयंक का कहना है कि उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और डेटा विज्ञान में है। 

मयंक गांधी एक वैश्विक आईसीटी संगठन के शिक्षा प्रमुख हैं, जो ऑस्ट्रेलियाई छात्रों को नई तकनीक जैसे एआई, एमएल, साइबर सुरक्षा और डेटा विज्ञान सीखने और रोजगार खोजने में मदद करने के लिए प्रशिक्षण देता है। मयंक का कहना है कि उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और डेटा विज्ञान में है। उन्होंने भारत में व्यवसाय प्रबंधन का अध्ययन किया है। वह अहमदाबाद में रहकर पढ़ाई कर चुके हैं।

मयंक का कहना है कि उन्होंने अकादमिक और कॉरपोरेट्स के बीच की खाई को पाटने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम किया है। संस्थानों की तकनीकी आवश्यकता को पूरा करने के लिए नवीनतम तकनीकों के साथ छात्रों को सक्षम करने में मदद के लिए कार्यक्रम बनाए हैं। उन्होंने छात्रों को ऑस्ट्रेलिया और दुनिया भर में बेहतर रोजगार हासिल करने में मदद की है। मयंक के मुताबिक अपने इस काम की वजह से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास के लिए ग्लोबल टैलेंट वीजा के लिए कदम आगे बढ़ाया। मयंक कहते हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र में कई वैश्विक सेमिनार किए हैं।

गौरतलब है कि 4 नवंबर 2019 को ग्लोबल टैलेंट इंडिपेंडेंट (GTI) कार्यक्रम को आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रेलियाई स्थायी निवास प्राप्त करने के लिए लॉन्च किया गया था। इसका लक्ष्य प्रतिभाशाली और अत्यधिक कुशल लोगों को स्थायी वीजा देना था।