जापान-चीन समेत एशिया-प्रशांत के इस क्षेत्र में आगे क्यों निकल रहा है भारत!

IATA के मुताबिक भारत अपने एशिया-प्रशांत साथियों से काफी आगे है। चीन और जापान दो ऐसे बाजार हैं जिनका एशिया-प्रशांत के हवाई यात्री यातायात पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। यह दोनों देश इस वक्त दुनिया के बाकी हिस्सों से पीछे हैं।

जापान-चीन समेत एशिया-प्रशांत के इस क्षेत्र में आगे क्यों निकल रहा है भारत!
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इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) का मानना ​​​​है कि यात्रा प्रतिबंधों में छूट के चलते एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यात्रा और पर्यटन उद्योग रिकवरी कर रहा है। हालांकि यह विश्वस्तर पर काफी पीछे है और इस क्षेत्र में भारत बाकी साथियों से काफी आगे है। मार्च के महीने में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की मांग दो वर्षों में जहां 10 फीसदी से नीचे थे वह अब इस क्षेत्र में बढ़कर 17 फीसदी पहुंच गई है।

IATA के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2022 में भारत की डोमेस्टिक उड़ानों में इजाफा हुआ और यह 82.3 फीसदी रहा। वहीं अमेरिका में यह 87.2 फीसदी था और दुनिया के बाकी घरेलू बाजारों का औसत 79.2 फीसदी था। इस वर्ष के पहले तीन महीनों के लिए यात्रियों के आधार पर भारत का घरेलू हवाई यातायात साल 2019 में यानी प्री-कोविड लेवल का कुल 70 फीसदी रहा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के आंकड़ों के आधार पर जनवरी से मार्च 2022 के बीच यात्रियों की कुल संख्या लगभग ढाई करोड़ रही। यह संख्या 2019 में इसी अवधि दौरान साढ़े तीन करोड़ थी।

Airplane aisle during flight
भारत आने वाले महीनों में प्री-कोविड लेवल तक ​​​​घरेलू यात्री यातायात के पहुंचने और फिर उससे अधिक होने की उम्मीद कर रहा है। Photo by Suhyeon Choi / Unsplash

भारत आने वाले महीनों में प्री-कोविड लेवल तक ​​​​घरेलू यात्री यातायात के पहुंचने और फिर उससे अधिक होने की उम्मीद कर रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मार्च में हैदराबाद में एक एयर शो में कहा था कि मुझे आने दिनों, आने वाले महीनों और अगले वर्ष तक दैनिक यात्रियों की संख्या 4,15,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। अगर रोजाना यात्रियों की संख्या इस स्तर को छूती है तो हम प्रीकोविड लेवल को जल्द ही पार करेंगे।

IATA के मुताबिक भारत अपने एशिया-प्रशांत साथियों से काफी आगे है। IATA के महानिदेशक विले वॉल्श ने कहा कि ​हालांकि चीन और जापान दो ऐसे बाजार हैं जिनका एशिया-प्रशांत के हवाई यात्री यातायात पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। यह दोनों देश इस वक्त दुनिया के बाकी हिस्सों से पीछे हैं और इस तरह यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के यात्रा और पर्यटन क्षेत्र की वसूली को प्रभावित कर रहे हैं। दोनों ही देशों ने यात्रा सेवाओं में छूट नहीं है। हालांकि जापान जून से यात्रियों के लिए अपनी सीमाएं खोल रहा है।

IATA ने बताया कि मार्च के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय यात्री मांग प्री-कोविड लेवल ​​के 17 फीसदी तक पहुंच गई जो वैश्विक प्रवृत्ति से काफी नीचे है। दरअसल विश्व स्तर पर बाजार प्री-कोविड लेवल के 60 फीसदी तक पहुंच गया है। वैश्विक हवाई परिवहन संघ का मानना ​​​​है कि यह सरकारी प्रतिबंधों के कारण है और जितनी जल्दी उन्हें हटा दिया जाएगा उतनी ही जल्दी क्षेत्रीय यात्रा उद्योग वापस वहीं लौट आएगा जहां वह था।