निर्वासन की पीड़ा को समझने वाले भारतीय मूल के अनिल मेनन को स्कॉलरशिप

अनिल मेनन के कई शोध अकादमिक जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। कई शोध ऐसे हैं जो अमेरिकन पॉलिटिकल साइंस रिव्यू, द इकोनॉमिक जनरल, अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित होने वाले हैं।

निर्वासन की पीड़ा को समझने वाले भारतीय मूल के अनिल मेनन को स्कॉलरशिप

न्यूयॉर्क स्थित कॉर्नेल विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस ने 7 शोधकर्ताओं को स्कॉलरशिप के लिए चुना है। इनमें से एक भारतीय मूल के अनिल मेनन हैं। इन सभी तो तीन साल का फेलोशिप दिया जाएगा। ये स्वतंत्र तरीके से कला, मानव विज्ञान, समाजशास्त्र और प्राकृतिक विज्ञान पर शोध करेंगे। राजनीति, अर्थशास्त्र के एक छात्र के रूप में भारतीय मूल के अनिल मेनन ने मिशिगन विश्वविद्यालय से शोध किया है। उन्होंने मनुष्यों के कृत्रिम और अस्वाभाविक निर्वासन पर किताब लिखी है। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय संघर्ष की वजह से निर्वासन की यह प्रक्रिया पूरी दुनिया में बढ़ रही है।

वर्तमान में मेनन मिशिगन विश्वविद्यालय में फेलो हैं। उनका कहना है कि निर्वासन की प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में अनेकानेक कारण हैं। इनमें से कुछ के तार अतीत से जुड़े हैं तो कुछ समकालीन हैं। कुछ के कारण मनुष्य की वजह से प्रकृति में आ रहे बदलावों की वजह से है। वहीं कुछ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक वजहें भी हैं। लेकिन कारण चाहे कुछ भी हो, इसकी पीड़ा वही समझ सकता है जो किसी न किसी रूप से निर्वासन के दर्द से गुजर रहा है।