दो साल बाद अमेरिकी फिर ले सकेंगे भारतीय आम का स्वाद, आयात को मंजूरी

यूएसडीए की इस अनुमति का मतलब है कि भारत आम के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के आम का निर्यात अमेरिका कर सकेगा। साल 2019-20 में भारत से अमेरिका को 4.35 मिलियन डॉलर (लगभग 34 करोड़ 450 रुपये) कीमत के आम का निर्यात किया गया था।

दो साल बाद अमेरिकी फिर ले सकेंगे भारतीय आम का स्वाद, आयात को मंजूरी

अमेरिका के लोग भी गर्मियों के मौसम में आम बहुत पसंद करते हैं। कोरोना वायरस यात्रा प्रतिबंधों के तहत साल 2020 से अमेरिका ने भारतीय आम के आयात पर रोक लगा दी थी। लेकिन इस साल अमेरिका के निवासी भी भारतीय आम का स्वाद ले सकेंगे। महामारी के प्रकोप में राहत मिलने के बाद अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) ने भारत से आम आयात की अनुमति दे दी है।

यूएसडीए की इस अनुमति का मतलब है कि भारत फिर से अमेरिका को आम के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों के आम का निर्यात कर सकेगा। अमेरिका में देसी स्टोर चलाने वाले लोग बताते हैं कि कई बार लोग आते हैं और किसी विशेष प्रजाति के भारतीय आम की मांग करते हैं। यहां पर लोग भारत में होने वाले चौसा, दशहरी, लंगड़ा और सिंदूरी आदि आम को खूब पसंद करते हैं।  

भारत से अमेरिका को आम के निर्यात की शुरुआत आम की अल्फांसो वैरायटी से होगी।

अब आम आयात की अनुमति मिलने के बाद भारत के आमों की प्रसिद्ध प्रकारों को खरीदना आयातकों के लिए संभव हो जाएगा। इसकी अनुमति देने का निर्णय यूएस ट्रेड पॉलिसी फोरम (TPF) की बैठक में लिया गया है। इस बैठक में अमेरिका और भारत ने भारतीय आम व अनार को लेकर एक संयुक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए थे। भारत से अमेरिका को आम के निर्यात की शुरुआत आम की अल्फांसो वैरायटी से होगी।

बता दें कि अमेरिकी बाजार में भारतीय आम की मांग हमेशा से ऊंची रही है। आम के कारोबारी अमेरिका को एक बड़े बाजार और संभावना के रूप में देखते हैं। साल 2019-20 में भारत से अमेरिका को 4.35 मिलियन डॉलर (लगभग 34 करोड़ 12 लाख 35 हजार 450 रुपये) कीमत के आम का निर्यात किया गया था। साल 2018-19 में हुए आम के निर्यात से मिली राशि के मुकाबले यह आंकड़ा लगभग 20 फीसदी अधिक था।

दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार भारत अमेरिका को आम के साथ अनार के निर्यात की भी शुरुआत करेगा। माना जा रहा है कि इस समझौते के होने से भारत के आम उत्पादकों को राहत मिलेगी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कृषि के क्षेत्र में संबंधों में भी विस्तार आएगा। बीते दो साल से अमेरिका को आम निर्यात नहीं कर पा रहे भारत के किसानों के लिए यह समझौता बेहद अच्छी खबर लाया है।

GP