AIA का 'जागरुकता और सहानुभूति' पर राष्ट्रीय सम्मेलन, बनी सहमति

राष्ट्रीय AIA अध्यक्ष गोबिंद मुंजाल ने कहा कि हम तेजी से विभाजित दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं। यूक्रेन में युद्ध चल रहा है जिसका समाप्त होने का कोई संकेत नहीं है। यह सब लोगों के बीच संवाद की कमी के कारण हो रहा है। गोबिंद मुंजाल ने कहा जागरुकता और सहानुभूति पर चर्चा करना एक अच्छा विचार होगा।

AIA का 'जागरुकता और सहानुभूति' पर राष्ट्रीय सम्मेलन, बनी सहमति

द एसोसिएशन ऑफ इंडियन इन अमेरिका (AIA) की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति ने 'क्या है जागरुकता और सहानुभूति और हम उन्हें अपने में कैसे बढ़ा सकते हैं' पर एक सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन की कल्पना AIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोबिंद पी मुंजाल, AIA की ट्रस्टी अस्मिता भाटिया और बोरिकुआ कॉलेज के प्रोफेसर शिवाजी सेनगुप्ता ने की थी। शिवाजी हाल ही में बोरिकुआ कॉलेज से अंग्रेजी के प्रोफेसर और इसके अकादमिक वीपी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

शिवाजी सेनगुप्ता ने चर्चा की शुरुआत की और समझाने की कोशिश की कि जागरुकता और सहानुभूति से उनका क्या मतलब है।

जूम के माध्यम से पिछले दिनों यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय AIA सचिव गुंजन रस्तोगी ने राष्ट्रीय AIA अध्यक्ष गोबिंद मुंजाल का कार्यक्रम की शुरुआत में परिचय कराया। मुंजाल ने डॉ. सेनगुप्ता से अपने परिचय में कहा कि हम तेजी से विभाजित दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं। यूक्रेन में युद्ध चल रहा है जिसका समाप्त होने का कोई संकेत नहीं है। यह सब लोगों के बीच संवाद की कमी के कारण हो रहा है। गोबिंद मुंजाल ने कहा जागरुकता और सहानुभूति पर चर्चा करना एक अच्छा विचार होगा ताकि इसके विस्तार से दूसरों की मदद की जा सके।

शिवाजी सेनगुप्ता ने चर्चा की शुरुआत की और समझाने की कोशिश की कि जागरुकता और सहानुभूति से उनका क्या मतलब है। जागरुकता केवल हमारे आस-पास के पर्यावरण, वातावरण, लोगों, प्रकृति के बारे में जागरूक नहीं है बल्कि इस बात को लेकर भी हम क्या महसूस करते हैं। सहानुभूति से समुदाय में किसी व्यक्ति की भावना को समझा जा सकता है। भावना और आत्म-जागरुकता के साथ संवाद करने की क्षमता सहानुभूति है। लेकिन जागरुकता और सहानुभूति संपर्क के बिना नहीं हो सकती।

सेनगुप्ता ने संपर्क को न केवल किसी के संपर्क में रहने के रूप में समझाया बल्कि संपर्क की प्रकृति के बारे में भी बताया। क्या हम किसी व्यक्ति विशेष के संपर्क में रहने से खुश, दुखी, परेशान, चिंतित हैं? उन्होंने कहा कि संपर्क तात्कालिक और अचानक नहीं है। यह एक प्रक्रिया है। जागरुकता उसका परिणाम है। अगर हमें सहानुभूति विकसित करनी है तो हमें संपर्क विकसित करना होगा। कार्यक्रम में अधिकांश प्रतिभागियों द्वारा जीवंत चर्चा भी की। कुछ सवाल कोविड को लेकर भी किए गए थे।

बैठक के अंत में लगभग एक महीने में एक और सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया गया। दर्शक इस विचार के प्रति उत्साही थे। कार्यक्रम में तीन मॉडरेटर गुंजन रस्तोगी, संतोष पांडे और नीलिमा मदान ने जागरुकता और संवेदनशीलता के साथ सम्मेलन को संभाला। सचिव गुंजन रस्तोगी ने सभी पूर्व राष्ट्रीय एआईए अध्यक्षों, चैप्टर अध्यक्षों, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और चैप्टर सदस्यों, समुदाय के नेताओं और आमंत्रित अतिथियों को इस सम्मेलन में भाग लेने और इसे एक बड़ी सफलता बनाने के लिए धन्यवाद दिया।